आजमगढ़। फसल के अवशेष को जलाना अब दंडनीय अपराध घोषित हो चुका है। फसल जलाने पर 2500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है। इसके लिए कंबाईन हार्वेंस्टिंग मशीन बिना रिपर के खेतों की कटाई में प्रयोग नहीं की जाएगी।
उप परियोजना निदेशक डा. पंकज सिंह ने बताया कि अगर कृषि भूमि का क्षेत्र दो एकड़ से कम होने की दशा में प्रति घटना 2500 रुपये, दो एकड़ से पांच एकड़ तक होने की दशा में अर्थ दंड 5000 रुपये प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक होने की दशा में 15000 रुपये प्रति घटना अर्थदंड लगाया जा सकता है। कंबाईन हार्वेस्टिंग मशीन का रीपर के बिना प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। कृषि अपशिष्ट के जलाए जाने की पुनरावृत्ति होने की दशा में संबंधित कृषकों को सरकार द्वारा प्रदत्त की जाने वाली सुविधाओं सब्सिडी आदि से वंचित किए जाने की कार्यवाही के निर्देश राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली द्वारा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों का प्रबंध करना अत्यंत आवश्यक है तभी जमीन में जीवांश पदार्थ की मात्रा में वृद्धिकर जमीन को खेती योग्य सुरक्षित रख सकते हैं। अवशेष को खेत में जलाने की अपेक्षा उनसे कंपोस्ट तैयार कर खेत में प्रयोग करें। जब किसान खरीफ, रबी, जायद की फसलों की कटाई, मड़ाई करते हैं तो जड़, तना पत्तियों के रूप में पादप अवशेष भूमि के अंदर और भूमि के ऊपर उपलब्ध होते हैं। इनको यदि 20 किग्रा यूरिया प्रति एकड़ की दर से मिट्टी पलटने वाले हल से/रोटावेटर से जुताई/पलेवा के समय मिला देने से पादप अवशेष लगभग 20 से 30 दिन के भीतर जमीन में सड़ जाते हैं। जिससे मृदा में कार्वनिक पदार्थो और अन्य तत्वों की बढ़ोत्तरी होती है। जिसके फलस्वरूप फसलों के उत्पादन पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।