आजमगढ़। अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार वर्मा की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में विवाहिता के पति और सास को दोषी पाते हुए दस वर्ष की कैद की सजा सुनाइ्र। साथ ही दोनों को कुल 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। इस मामले का एक अन्य आरोपी विवाहित की ननद मनीषा को पर्याप्त साक्ष के अभाव में बरी कर दिया। प्राप्त अर्थदंड की धनराशि का आधा हिस्सा वादी मुकदमा को दिया जाएगा।
तहबरपुर थाना क्षेत्र के खरचनपुर गांव निवासी सिरपत चौहान की पुत्री रीता की वर्ष 2009 में गंभीरपुर थाना के दयालपुर (मिर्जापुर) गांव निवासी राजू पुत्र रमेश चौहान के साथ हुई थी। 18 जुलाई 2012 को उसकी ससुराल में मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पिता ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया कि ससुराल के लोग दहेज में मोटर साइकिल की मांग को लेकर रीता को तरह-तरह से प्रताड़ित करते थे। इसी मामले को लेकर घटना के दिन फांसी लगाकर उसे मार डाले। इस मामले में गंभीरपुर थाना पुलिस ने विवाहित के पति राजू पुत्र रमेश चौहान, सास राजवंती पत्नी रमेश, रमेश पुत्री मनीषा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सत्र परीक्षण के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव ने इस मुकदमे के वादी समेत कुल आठ गवाहों को बतौर साक्षी पेश किया। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद विवाहित के पति राजू, सास राजवंती को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।