बूढ़नपुर। एक देश एक टैक्स का सपना देखते हुए सरकार ने जीएसटी को लागू कर दिया। लेकिन अब यही जीएसटी व्यापारियों की परेशानी का कारण बन गया है। सरकार द्वारा जीएसटी दाखिल करने के लिए बनाए गए पोर्टल में कमियों के कारण रिटर्न दाखिल करने में व्यापारियों को पसीने छूट रहे हैं।
देश में जीएसटी लागू करने के साथ ही सरकार ने व्यापारियों को टैक्स भरने में सहूलियत देने के लिए इंटरनेट पोर्टल का निर्माण कराया। ताकि व्यापारी घर बैठे टैक्स का भुगतान कर सकें। लेकिन पोर्टल के प्रोग्रामिंग में कुछ कमियां रह गई है। जीएसटी पोर्टल के डिजाईन में कमियों के चलते रिटर्न दाखिल करने में व्यापारियों के पसीने छूट रहे हैं। हाल यह है कि अंतिम तिथि नजदीक आने तक भी आधे से ज्यादा कारोबारी अपना जीएसटी जमा नहीं कर पाए हैं।जीएसटी रिर्टन दाखिल करने की अंतिम तिथि प्रत्येक महीने की 20 तारीख तक होती है। अंतिम तिथि के बाद रिटर्न दाखिल करने पर विलंब शुल्क 20 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज होता है। जिसमें 10 रुपये केंद्र सरकार और 10 रुपये राज्य सरकार को जाता है।
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एकाउंटेंट ओंकार यादव का कहना है कि जीएसटी पोर्टल की सबसे बड़ी कमी यह है कि जब कोई व्यक्ति जीएसटीआर दाखिल करता है तो सबसे पहले सबमिट बटन का विकल्प आता है। बहुत से एकाउंटेंसी सबमिट का बटन दबाकर ही यह समझते हैं कि रिटर्न जमा हो गया जबकि ऐसा नहीं है। दरअसल सबमिट के बाद चालान और फिर फाइल का विकल्प आता है। फाइल के विकल्प पर क्लिक करने पर ही जीएसटी रिटर्न जमा होता है। ऐसे में तमाम कारोबारियों ने जीएसटीआर सबमिट तो कर दिया है लेकिन अंतिम रूप से फाइल नहीं किया है।
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कंप्यूटर व्यवसाई गिरिजेश वर्मा ने बताया कि जीएसटी में नवंबर माह का विलंब शुल्क जमा करने के बाद भी दिसंबर माह का जीएसटी सबमिट नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं पोर्टल में लागिन के करने के बाद रिटर्न को फाइल सबमिट करने के लिए ओटीपी की आवश्यकता होती है। जो रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेजी जाती है ओटीपी सर्वर की कमी के चलते एक घंटे बाद आती है। जब कि ओटीपी 10 मिनट बाद बेकार हो जाती है। पोर्टल पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संबंधित अधिकारी से घंटों बात की गई लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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चार्टर्ड एकाउंटेंट राजेश ने बताया कि व्यक्तिगत जीएसटीआर दाखिल करते समय बार-बार इरर सिस्टम फेलियर मैसेज आता रहता है। बड़ी मुश्किल से वह रिटर्न दाखिल कर पाए। उन्होंने बताया कि जीएसटीआर-3 फार्म में जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 का मिलान होता है। कारोबारियों की शिकायत रही है कि जीएसटी के पोर्टल पर इन्वॉयस मैचिंग में दिक्कत आ रही है।