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घाघरा में फिर बढ़ाव शुरू

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लाटघाट। तीन दिन तक लगातार घटाव के बाद घाघरा ने अपनी चला फिर बढ़ा दी है। इससे बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के माथे पर फिर चिंता की लकीरें खिंच आई हैं। रविवार शाम बदरहुआ गेज पर घाघरा के जलस्तर में सात सेमी और डिघिया गेज पर 14 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कटान बढ़ने और संक्रामक बीमारियों के पैर पसारने से ग्रामीणों की परेशानी में इजाफा हो गया है।
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शनिवार को घाघरा नदी का जलस्तर बदरहुवा गेज पर 71.36 मीटर और डिघिया पर 70.37 मीटर पर था। रविवार शाम को बदरहुवा गेज पर जलस्तर 71.43 मीटर और डिघिया में 70.50 मीटर दर्ज किया गया। डिघिया में नदी अभी भी लाल निशान से ऊपर बह रही है। बदरहुवा में लाल निशान 71.68 और डिघिया में 70.40 मीटर पर है। तीन दिन तक पानी घटना से बाढ़ प्रभावितों ने राहत की सांस ली थी कि धीरे धीरे उन्हें बाढ़ के प्रकोप से मुक्ति मिल जाएगी और वो सामान्य जीवन शुरू कर सकेंगे। लेकिन पिछले दो दिन में हुई मूसलाधार बारिश और ऊपर से पानी छोड़े जाने के कारण रविवार को घाघरा का पानी फिर एकाएक बढ़ गया। इससे ग्रामीणों की उम्मीद एक बार फिर टूटती नजर आ रही है। बाढ़ के कारण गांव के संपर्क मार्ग टूट चुके हैं। देवारा खास राजा, बांका, बुढ्नपट्टी आदि गांवों का संपर्क मार्ग ध्वस्त हो चुका है। इससे करीब 10 हजार लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। काफी दिन से पानी जमा होने के कारण दुर्गंध उठनी शुरू हो गई है। इससे गांव मे वायरल फीवर, खाज-खुजली आदि का प्रकोप बढ़ गया है। बीमार को चारपाई से ही बाहर बंधे तक ले जाया जा सकता है। देवारा खास राजा के प्रधान पल्टन यादव ने कहा कि जब तक रास्ता सही नहीं होगा, ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। हालांकि जिलाधिकारी ने कहा है कि पानी उतरते ही मनरेगा से मार्गों का मरम्मत कराई जाएगी। लेकिन ये पानी उतरने के बाद ही संभव है।
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गन्ना छोड़ सभी फसले पूरी तरह नष्ट
लाटघाट। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। गन्ना की भी लगभग 60 फीसदी फसल हुई है। अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का की फसल पूरी तरह सड़ गई है। सर्वाधिक नुकसान धान की खेती करने वालों किसानों को हुआ है। परसिया गांव निवासी भजुराम सिंह पटेल ने बताया कि 10 बीघा से ऊपर धान की रोपाई की थी। सब खराब हो गया। आठ हजार की लागत आई थी। उर्दिहा गांव के प्रधान ओमप्रकाश सिंह पटेल ने कहा कि गन्ना सिर्फ 20 फीसदी बचा है। धान की फसल नष्ट हो गई है। देवारा खास राजा गांव के चंद्रबली, आशीष यादव, राम सिंह आदि ने बताया कि धान की खेती पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
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चेता प्रशासन, प्रभावितों को मिली राहत सामग्री
लाटघाट। शनिवार को अमर उजाला की ओर से विस्थापितों को राहत सामग्री नहीं मिलने के मुद्दा उठाने के बाद रविवार को तहसील प्रशासन ने कूड़ही बंधे पर विस्थापित लोगों में राहत सामग्री वितरित कराई। उर्दिहा गांव के जो ग्रामीण राहत से वंचित थे उन्हें राहत पैकेट मुहैया कराया गया। ग्राम प्रधान ओमप्रकाश सिंह पटेल ने बताया कि सभी ग्रामवासियों को आपदा राहत पैकेट तहसील प्रशासन ने मुहैया करा दिया है।
पानी से फिर घिरने लगा चक्की हाजीपुर
पानी से फिर घिरने लगा चक्की हाजीपुर
-प्रशासन के नाव हटाते ही फिर बढ़ने लगा जलस्तर
-राहत सामग्री का राशन भी हुआ खत्म, अब फांकाकशी
-पूरे दिन में मिल रही 5-6 घंटे बिजली, परेशानी बढ़ी
लाठघाट (ब्यूरो)। सगड़ी क्षेत्र के देवारांचल में रविवार को घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से चक्की हाजीपुर गांव पानी से फिर घिरना शुरू हो गया है। पिछले तीन दिन से पानी घटने से हाजीपुर से देवरा खास राजा, मानिकपुर से मानिकपुर नई बस्ती, खरैलिया से सोनौरा, शाहडीह से बाका, बुढ़नपट्टी मार्ग से प्रशासन की ओर से चलाई जा रही नावों को भी हटा लिया गया है। वहीं मार्ग बीच-बीच में पानी के प्रवाह के कारण कट गया है। इससे आवागमन बाधित है। देवरा क्षेत्र के गांव से भी पानी हट गया था, जलस्तर बढ़ने से गांव फिर घिरनेे के कगार पर हैं। सरकारी विद्यालय अभी बंद पड़े हैं। पढ़ाई बाधित है। पशुओं के लिए चारे की समस्या है। प्रशासन की ओर से भूसा बांटा गया, लेकिन वो भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। दाम महुला के रामलखन और कोमल साहनी का परिवार प्राथमिक विद्यालय दाममहुला में है। इनका कहना है कि राहत सामग्री का पैकेट मिला था, जो एक हफ्ते में ही खत्म हो गया। अब जैसे तैसे गुजारा हो रहा है। हैदराबाद बंधे पर अभी भी 20 विस्थापित परिवार हैं। विस्थापित राजपति, दारू, विनोद, मोहित, सुदर्शन, भोला, राम सरन, बहादुर, सरस्वती, महेंद्र, दंगल, पुनवासी आदि ने बताया कि प्रशासन से मिला राशन खत्म हो गया है। अमरनाथ यादव देवारा खास राजा ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। पूरे दिन में पांच घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
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