आजमगढ़। गांवों से खत्म हो रहे खलिहान और अनाज भंडारण को लेकर परेशान रहने वाले किसानों की परेशानी अब दूर होने वाली है। किसानों की परेशानी को देखते हुए जनपद के 27 गांवों में थ्रेसिंग प्लेटफार्म और एक स्थान पर गोदाम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। थेसिंग प्लेटफार्म का आवंटन ऐसे होगा कि सभी ब्लाकों में इसका निर्माण हो जाए। इस सुविधा को पाने के लिए किसानों को समूह बनाकर कृषि विभाग की वेबसाइट पर डिमांड करनी पड़ेगी। जिलाधिकारी ने कृषि विभाग के अधिकारियों की मीटिंग लेकर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कहा है।
पहले चकबंदी के बाद बचत की जमीन को खलिहान आदि के छोड़ा जाता था। इसका प्रयोग किसान खेती किसानी के लिए करते थे। समय के साथ आबादी बढ़ने और रकबा घटने से खलिहान आदि की जमीन कम होती गई। अब मड़ाई और अन्य कार्य के लिए किसानों को परेशान होना पड़ता है। यदि खेतों में मड़ाई कराई जाए तो बराबर जमीन न होने से नुकसान होता है। ऊपर से बारिश आदि होने पर फसल की भीगने का भी डर होता है। वहीं, कई छोटे किसान ऐसे होते हैं जो सीजन में रेट कम होने पर अपनी फसल को रखना चाहते हैं, लेकिन जमीन की उपलब्धता नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो पाता है। ऐसे किसानों की समस्या को देखते सरकार ने इसकी सुधि ली है। मड़ाई आदि के लिए किसानों को अब 200 वर्ग मीटर का थ्रेसिंग प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए किसानों को 1.70 लाख रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा। कार्यदायी संस्था की ओर से इसका निर्माण किया जाएगा। फर्श पक्का होगा और बजट रहा था टीन शेड भी बनाया जाएगा। इसके लिए किसानों को आठ से दस का समूह बनाकर कृषि विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद ही किसानों को इसका लाभ मिलेगा। जिले में 27 गांवों थ्रेसिंग प्लेटफार्म बनाने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण ऐसे होगा की जिले के हर ब्लाक में एक थ्रेसिंग प्लेटफार्म बन जाए।
वहीं, किसानों को अपने अनाज के भंडारण के लिए गोदाम भी बनाया जाएगा। इसके लिए 93 लाख की लागत से छह से सात बिस्वा में बनने वाले इस गोदाम की निर्माण भी कार्यदायी संस्था कराएगी। जिले में अभी एक गोदाम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भी किसानों को समूह बनाकर विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। खास बात ये है कि थ्रेसिंग प्लेटफार्म और गोदाम के रख रखाव की जिम्मेदारी भी किसानों को ही उठानी पड़ेगी। गोदाम में अपना अनाज, खाद और बीज रखने के साथ ही किसान इसे किराये पर भी दे सकते हैं। किराये के रूप में जो आमदनी होगी उससे गोदाम का मेंटीनेंस किया जाएगा। उप कृषि निदेशक आरके मौर्या ने बताया कि जिलाधिकारी ने लक्ष्य के प्राप्ति और योजना के प्राभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। किसान जसमूह बनाकर विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं और योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करें।
किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार की ओर से योजना तैयार की गई है। इससे किसानों की थ्रेसिंग और भंडारण को लेकर होने वाली परेशानी दूर होगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देष कृषि विभाग के अधिकारियों को दिए गए हैं।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी