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342 गांव ओडीएफ प्लस माडल बनाए जाएंगे, नोडल अधिकारी नामित

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जिले के 22 ब्लाकों में 342 गांवों को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 में ओडीएफ प्लस माडल गांव बनाए जाएंगे। ठोस और तरल अपशिष्ट का प्रबंधन कर गांवों में ही निस्तारण कराया जाएगा। इसको लेकर पंचायती राज विभाग ने सभी गांवों का सर्वे करने के लिए 342 नोडल अधिकारी नामित किए गए। वह गांवों में जाकर सर्वे कर अपनी आख्या प्रस्तुत करेंगे। जिसके आधार पर आग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने ऑनलाइन कार्यशाला आयोजन का उद्देश्य एवं ओडीएफ प्लस ग्राम करने के लिए निर्धारित प्रावधान एवं संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।उन्होंने ओडीएफ प्लस के लक्ष्य, उदेश्य, आने वाली चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपशिष्ट प्रबंधन की विभिन्न तकनीकी, ठोस अपशिष्ट के अन्तर्गत जैविक, अजैविक, हानिकारक कचरों की मौजूदा स्थिति, समस्याओं एवं निस्तारण के प्रबंध पर घरेलू दूषित जल के लिए सोख्ता गड्ढे, प्लास्टिक प्रंबधन, मलीय कीचड़ प्रंबधन, मासिक धर्मचक्र प्रबंधन पर स्लाइडों के माध्यम से समझाया। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी से कहा कि ओडीएफ प्लस माडल पंचायत बनाने के लिए सभी को वास्तविक स्थिति का आंकलन करते हुए कार्ययोजना का निर्माण करने व उसके क्रियान्वयन में पूरा सहयोग प्रदान करे। इस अवसर पर जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे, जिला समन्वयक प्रीति सिंह एवं एसएलडब्ल्यूएम के सलाहकार शिवम रॉव एवं आलोक यादव उपस्थित रहे। कार्यशाला में जनपद के 342 ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, राजमिस्त्री, समस्त खण्ड प्रेरक एवं समस्त सहायक विकास अधिकारी पंचायत मौजूद रहे।
गांव में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनेगा
आजमगढ़। गांवों से निकलने वाले कचरे के लिए गांवों में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र की स्थापना की जाएगी। गांवों में घर-घर से कचरा एकत्र किया जाएगा। उसके बाद अवशिष्ट केंद्र पर अलग-अलग किया जाएगा।
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ब्लाक स्तर पर होगा प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन
ब्लाक स्तर पर होगा प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन डीपीआरो लालजी दुबे ने बताया कि प्लास्टिक कचरे को गांवों से घर-घर से एकत्र किया जाएगा। उसके बाद उसका भंडारण, ढुलाई और पुर्नचक्रण योग्य भाग को पंजीकृत एजेंसी तक भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। गांवों स्तर पर भंडारण की सुविधा एवं विकासखंड स्तर पर प्लास्टिक कचरा के प्रबंधन की इकाई की स्थापना कराई जाएगी। प्लास्टिक यूनिट 16 लाख की लागत से तैयार की जाएगी। डीपीआरओ ने बताया कि गोबर धन योजना के अन्तर्गत पशुओं के गोबर के प्रबंधन के लिए यूनिट की स्थापना कराई जाएगी, जिससे ग्रामीणों को लाभ मिल सकेगा।
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