आजमगढ़। जिले में तमसा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए जिले में 330.21 करोड़ रुपये खर्च कर सीवरलाइन बिछाई गई। वहीं 42.21 करोड़ रुपये खर्च कर एसटीपी का निर्माण भी किया गया। नगर की 6153 नालियों में से 4100 नालियों को इससे जोड़ा गया इसके बाद भी तमसा में आज भी बिना शोधित किए ही पानी प्रवाहित किया जा रहा है।
जिले में तमसा को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक तमसा को प्रदूषण मुक्त करने में सफलता नहीं मिल सकी है। क्योंकि अभी तक नगर से निकलने वाले सारे नालों और नालियों को इससे जोड़ा नहीं जा सहा है। जिले में लगभग 330.21 करोड़ रुपये की लागत से सीवरलाइन बिछाई गई, जबकि 42.21 करोड़ रुपये खर्च कर एसटीपी का निर्माण किया गया। इसके बावजूद नगर की कुल 6153 नालियों में से केवल 2500 से ज्यादा नालियों को ही सीवरलाइन से जोड़ा जा सका है। शेष नालियों का गंदा पानी सीधे तमसा नदी में प्रवाहित हो रहा है, जिससे नदी की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अभी तक नगर के मात्र आधे से भी कम हिस्से का पानी ही शोधित होने के लिए एसटीपी तक पहुंच रहा है। शेष को एसटीपी से जोड़ने का काम अभी तक अधूरा है। जब तक सभी नालों और नालियों को इससे जोड़ा नहीं जाता तब तक तमसा को प्रदूषण मुक्त करने का सपना अधूरा ही रहेगा।
दो हिस्सों में बंटा है शहर-आजमगढ़ शहर की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यह दो हिस्सों में बंटा है। एक हिस्सा तमसा नदी के उत्तरी तरफ है। इसमें रोडवेज से लेकर हर्रा की चुंगी तक का इलाका आता है। वहीं दूसरा तमसा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। जो सिधारी से शुरू होकर बेलइसा तक जाता है। दोनों तरफ से नालों का पानी बिना शोधित किए ही तमसा में प्रवाहित होता है।
तीन एसटीपी की जरूरत दो के लिए हो रही जमीन की तलाश-नगर से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए अभी तीन एसटीपी की जरूरत है। इसमें से हरबंशपुर और सिधारी में एसटीपी की स्थापना के लिए काफी दिनों से जमीन की तलाश की जा रही है जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
नगर पालिका पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगा चुका है जुर्माना-नगर के जालंधरी मुहल्ले में स्थित पोखरी में नपा द्वारा गंदा पानी बहाया जा रहा था। इस प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी के निर्देश पर नगरपालिका के ऊपर 2024 में 15 लाख का जुर्माना लगाया था। वहीं तमसा में बिना शोधन के ही गंदा पानी प्रवाहित करने पर 39.95 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
नगर क्षेत्र में अभी दो एसटीपी लगाने की और जरूरत है। शासन के निर्देश पर सिधारी और हरबंशपुर में जमीन की तलाश की जा रही है। अभी तक यह जमीन नहीं मिल पाई है। जमीन मिलते ही एसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। जीयाउल हक, अधिशासी अभियंता, जल निगम नगरीय।
12 मुहल्ले सीवर लाइन से जुड़े -अधिशासी अभियंता जीयाउल हक ने बताया कि तमसा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए शासन स्तर से एसटीपी निर्माण के लिए 2022 में 42.21 करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृति मिली थी। जनवरी 2022 से काम शुरू हुआ था। शहर के एलवल, दलालघाट, मुकेरीगंज, कटरा, चौक, पहाड़पुर, फरासटोला, हर्रा की चुंगी, रहमत नगर, आसिफगंज, पांडेय बाजार सहित 12 मुहल्लों में 22 किमी सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। पठखौली में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का काम पूरा होने के बाद जल निगम जून 2026 में इसे नगर पालिका को हैंडओवर कर देगा। सीवर लाइन से 10 बड़े नालों और ढाई हजार से अधिक नालियों को जोड़ दिया गया है।