निजामाबाद। इस आतंकवादी हमले ने निजामाबाद तहसील के गौसपुर घूरी गांव निवासी कोबरा कमांडो सिनोद कुमार के परिजनों को उनके पुत्र की याद ताजा कर दी। क्योंकि ऐसे ही एक नक्सली हमले ने उनके लाल को उनसे छीन लिया था। जिसकी याद में आज भी उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं लेते हैं।
निजामाबाद तहसील क्षेत्र के गौसपुर घूरी गांव निवासी सिनोद कुमार सीआरपीएफ 205 बटालियन में कोबरा कमांडो में भर्ती हुए थे। 18 जुलाई 2016 को औरंगाबाद बिहार में बोध गया स्थान पर नक्सली हमले में वह शहीद हो गए थे। धीरे-धीरे समय बीतता गया और उनके परिवार के लोगों का यह जख्म भरने लगा। लेकिन जैसे ही गुरुवार को यह घटना हुई और उन्हें इसकी जानकारी मिली उनके पुराने जख्म फिर हरे हो गए। पूरे परिवार की आंखें अपने लाल की याद में नम हो गई। उनके परिवार का कहना है कि हम जानते हैं किसी अपने के जाने का गम। सरकार को अब कुछ न कुछ करना चाहिए। ताकि फिर कोई ऐसी घटना करने का दुस्साहस न कर सके। जब कोई बड़ी घटना होती है तब सरकार कुछ सोचती है और बड़े-बड़े भाषण देती है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसा कदम उठाए कि सैनिकों की शहादत बेकार न जाए और कोई ऐसा करने से पहले 10 बार सोचे।