आजमगढ़। नगर के रैदोपुर स्थित शारदा टाकिज परिसर में सूत्रधार संस्थान द्वारा आयोजित आरंगम 2018 में सोमवार को नाटक मुसाफिर किस्सोंवाला का मंचन किया गया। जिसमें कलाकारों ने एक सामान्य से लड़की के असामान्य संघर्ष को बहुत ही सहज ढ़ंग से प्रस्तुत किया।
आरंगम के तीसरी संध्या की शुरूवात चंदन उत्पाती और गोविंद विद्यार्थी के लोकगीतों से हुई। इसके बाद कलाकारों ने नाटक मुसाफिर किस्सों वाला का मंचन किया। नाटक की कहानी है एक सामान्य लड़की के असामान्य संघर्ष की कहानी है। उसके सपने देखने से लेकर उन सपनों के टूट कर बिखरने और फिर विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभाल कर उन परिस्थितियों को चुनौती देते हुए उस पर विजय पाने की। रिश्तों के लिए कोई भी त्याग करने वाली आराध्या भाई के लिए आदर्श बहन, दोस्तों के लिए राजदार साथी और मां-बाप की लाडली है। बिटिया आराध्या के लिए उसके पिता किसी फिल्मी हीरो सरीखे हैं। जो उसकी सारी जरूरतें उसके कहने से पहले ही पूरी कर देते हैं। आराध्या भी अपने पिता का गौरव और समाज के लिए एक आदर्श बेटी है। दोनों में दूरियां तब आती हैं जब आराध्या की नजदीकियां उसके सहपाठी साहिल के साथ बढ़ती हैं और वो अपने पिता के समक्ष उससे विवाह करने का प्रस्ताव रखती है। इस बात से नाराज होकर पिता आराध्या का विवाह अविरल जो कि सरकारी नौकरी में होता है, के साथ तय कर देते हैं। आराध्या के लिए उसके पिता से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है इसलिए वो अविरल से शादी करने के लिए तैयार हो जाती है। विवाहोपरांत उसके साथ ससुराल में उसे जिन प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ता है वैसी तो कोई किसी को बद्दुआ भी न देता होगा। अधमरी सी आराध्या किसी तरह अपने मां-बाप के पास वापस पहुंचती है, वो मानसिक और शारीरिक रूप से इतना टूट चुकी थी कि उसे फिर से संभालना जैसे किसी शिशु को जन्म देने से भी जटिल कार्य था। लेकिन पिता के स्नेह, संबल, साहस और समर्पण ने आराध्या को जीवन जीने की नई वजह दी। आराध्या दृढ संकल्पित होकर नए जीवन की शुरुआत करती है। इस नए जीवन में आराध्या को उत्साह एवं उमंग रुपी जो पर लगे हैं उससे वो किसी भी आकाश को पार करने की क्षमता रखती है। आराध्या न सिर्फ मां-बाप के बुढापे का सहारा बन गई बल्कि अपने परिवार को गर्व से जीने की वजह भी दे दी। भारतेंदु नाट्य अकादेमी की कार्यशालाओं से प्रशिक्षित विजित सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित एवं अभिनित इस एक घंटे की प्रस्तुति ने दर्शकों को बांध कर रखा। जिसमें राजेंद्र प्रसाद का संगीत और नंदकिशोर की प्रकाश परिकल्पना ने उनका भरपूर सहयोग दिया। लोकगीत के मंच का संचालन विनय कुमार और नाट्य मंच का संचालन नाट्य निर्देशक अभिषेक पंडित ने किया। इस मौके पर डा. अमित सिंह, इस पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधी प्रणीत श्रीवास्तव, डा. अलका सिंह, अविनाश सिंह, तरूण राय, नीरज सिंह, डीडी संजय, बृजनाथ सिंह, दीपक यादव आदि उपस्थित रहे।