आजमगढ़। तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर बाजार में शुक्रवार को पुलिस ने छापेमारी कर भले ही लाखों रुपये के रेक्टीफाइ एल्कोहल के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन अवैध शराब का कारोबार इस क्षेत्र में वर्षों से चल रहा है। इस कारोबार का मुख्य आरोपी बबलू सिंह मेंहनगर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके इस कारोबार में उसका भाई भी शामिल है। बबलू सिंह गुर्गे तो कई बार पकड़े गए हैं। लेकिन वह पुलिस के हाथ से बच निकला और बाद में उस पर कार्रवाई का मामला ठंडा पड़ गया। जबकि बबलू अपने कारोबार को आगे बढ़ाते चला गया।
बता दें कि वर्ष 2014 में तरवां थाने की पुलिस ने एक डीसीएम शराब पकड़ी और थानाध्यक्ष की मिली भगत से उसे 25 लाख रुपये में बेच दिया। एसओ के इस कारनामे के विषय में लालगंज सर्किल के तात्कालीन सीओ रहे सुखसागर शुक्ला ने कार्रवाई के लिए एसपी को रिपोर्ट भेजी थी लेकिन बाद में मामले को दबा दिया गया। पुलिस ने शराब की जो यह खेप पकड़ी थी कि वह शराब मेंहनगर थाने के बीरपुर गांव निवासी बबलू सिंह की थी। इस घटना के बाद बबलू स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग के लोगों को मिला लिया और अपने धंधे को आगे बढ़ाने लगा। वर्ष 2015 में तात्कालीन एसपी आकाश कुलहरि ने तरवां थाने के रासेपुर बाजार सहित अन्य सरकारी ठेकों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद किया। लेकिन मुख्य कारोबारी बबलू सिंह पुलिस के हाथ नहीं लग सका। बाद में यह मामला ठंडा पड़ गया। जिसका फायदा उठाते हुए बबलू अपने इस धंधे में आबाकारी विभाग के अन्य कई अधिकारियों को भी मिली लिया और सरकारी डिस्टलरी से रेक्टीफाइ एल्कोलहल मंगाकर शराब तैयार कर पूर्वांचल में सप्लाई करने लगा। उसके इस कारोबार मेें उसके सगे संबंधियों के अलावा उसका भाई विनय सिंह भी हाथ बंटाता है। जो शुक्रवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गया। प्रभारी निरीक्षक तरवां प्रवीण यादव ने बताया कि इस धंधे का मुख्य कारोबारी बबलू सिंह मेंहनगर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसकी तलाश की जा रही है।