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डिप्थीरिया को लेकर जारी किया गया अलर्ट

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डिआजमगढ़। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में डिप्थीरिया, गलाघोंटू से होने वाली मौतों के बाद स्वास्थ्य महकमे को अलर्ट कर दिया गया है। रेपिड रेस्पांस टीमों (आरआरटी) को सक्रिय कर दिया गया है। आवश्यक दवाओं और टीके की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। यदि बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, त्वचा का रंग नीला और बुखार के लक्षण दिखे तो नजदीक के चिकित्सालय और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच कराएं। राष्ट्रीय वेक्टर बार्न रोग नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. मिथलेश चतुर्वेदी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मामलों की पहचान करने और तत्काल इलाज कर उन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को बीमारी के खिलाफ सतर्क कर दिया गया है। दैनिक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। एसीएमओ डॉ. संजय कुमार बताया कि डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो जीवाणु कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया के कारण होती है। मुख्य रूप से गले और ऊपरी वायुमार्ग को संक्रमित करती है। अन्य अंगों को प्रभावित करने वाले टोक्सिन यानि जहर को उत्पन्न करती है। इससे गले में सूजन और सांस लेने में कठिनाई आती है। धीरे-धीरे गला चोक होने लगता है। शुरुआत में इसे कम बुखार और गले में सूजन से चिह्नित किया जाता है। समय से इलाज न किया गया तो बच्चे की मौत भी हो सकती है। डिप्थीरिया से बचाव के लिए तीन प्राथमिक टीकाकरण और दो बूस्टर खुराक प्रदान किए जाते हैं।
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डिप्थीरिया के लक्षण
डिफ्थीरिया होने पर सांस लेने में कठिनाई होती है।
गर्दन में सूजन हो सकती है। यह लिम्फ नोड्स भी हो सकता है।
बच्चे को ठंड लगती है, लेकिन यह कोल्ड से अलग होता है।
संक्रमण फैलने के बाद हमेशा बुखार रहता है।
खांसी आने लगती है। खांसते वक्त आवाज भी अजब हो जाती है।
त्वचा का रंग नीला पड़ जाता है। बच्चा हमेशा बेचैन रहता है।
संक्रमित बच्चे के गले में खरांश की शिकायत हो जाती है।

डिप्थीरिया से बचाव
आजमगढ़। वैक्सीनेशन से बच्चे को डिप्थीरिया बीमारी से बचाया जा सकता है। नियमित टीकाकरण में पेंटावेलेंट्स के संयुक्त टीके में डीपीटी के लगाए जाते हैं। बच्चे को छठे, 10वें और 14वें सप्ताह में टीकाकरण किया जाता है। 16 से 24 माह पर डीपीटी का पहला बूस्टर और पांच साल में दूसरा बूस्टर लगाया जाता है। इसके अलावा, गंभीर परिस्थिति में बच्चे को एंटी टोक्सिन भी दिया जाता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया की संभावना कम रहती है।
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