लाटघाट। देवारांचल में घाघरा के बाढ़ की स्थिति दिनों दिन विकराल होती जा रही है। वहीं प्रशासनिक अमला अब तक पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है। उच्चाधिकारियों का दौरा होने पर भले ही तहसील प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को कुछ मदद उपलब्ध करा देता हो, लेकिन बाढ़ पीड़ितों को जो वास्तविक मदद मिलनी चाहिए वह अब तक नहीं मिल सकी है। वहीं बांध के दूसरी तरफ स्थित आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है, कारण यह है कि महुला- गढ़वल बांध का डेढ़ किमी हिस्सा काफी जर्जर हो चुका है और प्रशासनिक अमला और संबंधित विभाग अब तक मौन साधे हुए है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत महुला-गढ़वल बांध का निर्माण कराया गया था। इस बांध को बनाने का उद्देश्य बांध के दूसरी तरफ रहने वाली आबादी को घाघरा के बाढ़ से बचाना था। लगभग हर वर्ष बाढ़ आती है और बंधे पर घाघरा के जलधारा का दबाव पड़ता है। इसी बंधे के लगभग डेढ़ किमी लंबे हिस्से का वर्तमान में काफी बुरा हाल है। डिघिया से डगरा तक बंधा काफी जर्जर हाल में पहुंच चुका है। पिछले वर्ष ही इस डेढ़ किमी बंधे में छह स्थानों पर रिसाव शुरू हो गया था। जिसे ग्रामीणों ने दिन रात अथक प्रयास कर किसी तरह बांधने में सफल हुए थे। इसके बाद भी इस जर्जर हो चुके बंधे को ठीक कराने की कवायद संबंधित विभाग ने अब तक नहीं करायी। पिछले साल आये बाढ़ में जूनियर हाई स्कूल के पीछे देवस्थान के पास, बागीचा गांव के सामने, मुस्लिम बस्ती के पास, छोटी छितौनी गांव के पास और डिघिया नाला के पास बंधा कमजोर पड़ गया था। ग्रामीणों का कहना है कि जब से बंधे का निर्माण हुआ है तब से अब तक इसकी मरम्मत नहीं करायी गई है, जिसके चलते ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है। यदि शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ने पर इस डेढ़ किमी में बंधे को बचाना काफी मुश्किल हो जाएगा।