फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारों की बेरूखी से नहीं दूर हो सका तमसा का प्रदूषण

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। विभिन्न शहरों से होकर गुजरने वाली छोटी नदियों तमसा, घाघरा को लेकर कोई फिक्रमंद नहीं है। चंद आंदोलनों को छोड़ देें तो इसके लिए खुलकर कोई आवाज बुलंद नहीं करता है। जो प्रयास होते हैं वे भी पौधरोपण आदि तक सीमित है। यही कारण है कि प्रदूषण से तमसा का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। ऐसे में अभी नहीं चेते तो जल्द ही गंभीर परिणाम दिखने लगेंगे।
विज्ञापन

जैसे-जैसे जनपद मेें नगरीय क्षेत्र बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे तमसा में गिरने वाले नालों की संख्या भी बढ़ती गई। सरकारें गंगा और यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन जिले की जीवनदायिनी तमसा की हालत से हर किसी ने आंखें मूंद रखी है। नगर के राजघाट से लेकर आत्माघाट तक 22 नाले इसमें गिर रहे हैं। न सिर्फ इसका पानी काला पड़ने लगा है बल्कि कई जगहों पर मछलियों के मरने की सूचना भी मिलती रहती हैं। नदी की हालत सुधारने के लिए तमसा बचाओ आंदोलन, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति और भारत रक्षा दल ने कई बार आंदोलन चलाए और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। लेकिन शासन और प्रशासन की उदासीनता ने उनके हौसले को भी तोड़ दिया। अब तो कोई संगठन तमसा के प्रदूषण को लेकर आवाज तक नहीं उठा रहा है।

हमने तो नगर क्षेत्र से गिरने वाले नालों की गिनती नदी के किनारे घूम-घूमकर की। नगर के राजघाट से लेकर आत्मा घाट तक 22 नाले नदी में गिरते हुए मिले। हमने नगरपालिका को ज्ञापन सौंपा कि वह सीवर से नदी में गिर रहे गंदे पानी को रोके। लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो हमने प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपकर उसे जागरूक करने का कार्य किया।
विज्ञापन

सुजीत भूषण श्रीवास्तव, संयोजक, तमसा बचाओ आंदोलन।

हमने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नदी में साफ-सफाई कर शासन और प्रशासन को जगाने का प्रयास किया। इसके लिए धरना और प्रदर्शन कर ज्ञापन भी सौंपा लेकिन हमारी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिसके कारण कार्यकर्ता भी निराश हो गए और हमने अपने आंदोलन को बंद कर दिया।
हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्यक्ष, भारत रक्षा दल।

अपनी संस्था के माध्यम से हमने प्रशासन के साथ ही जनता को भी जागरूक करने का प्रयास किया। लेकिन जनपद के जनप्रतिनिधि और सरकारें तमसा की दुर्दशा को लेकर चिंतित नहीं हैं। हमने जनपद के अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी अपनी आवाज पहुंची लेकिन कोई कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
विज्ञापन

एसके सत्येन, संयोजक, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें