आजमगढ़। नोटबंदी को एक साल हो गए लेकिन अभी तक बैंकों में कैश की किल्लत पूरी तरह से दूर नहीं हुई है। सरकार ने डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया लेकिन अभी भी कैश पर ही लोगों का भरोसा ज्यादा है। दूकानों पर स्वाइप मशीन अभी मौजूद नहीं है। जिसके कारण बैंकों में कतार कुछ छोटी तो हुई है लेकिन खत्म नहीं हुई है।
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में संचालित एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों की बंदी कर दी। नोटबंदी के बाद इन नोटों को बदलने के लिए बैंकों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने लाइन में लगकर, भूखे प्यासे रहकर अपने पुराने नोटों को बदला। इसके लिए लोगों को पुलिस की लाठियां तक खानी पड़ी। कई लोगों की मौत भी हो गई। कई लोग अपने बेटे-बेटी की शादी को धूम धाम से नहीं कर सके। लेकिन जनता ने सबकुछ सह लिया। इस बात को एक साल होने को आए लेकिन अभी भी नोटबंदी का असर बरकरार है। ज्यादातर एटीएम नोट की कमी के कारण आज भी बंद रहते हैं। दूकानों पर अभी तक स्वाइप मशीनें उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी भी लोग कैश में लेनदेन करने को विवश है। बैंकों में लाइन छोटी तो हुई है लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
हरेंद्र निषाद ने कहा कि नोटबंदी के असर अब भी खत्म नहीं हुआ है। बैंकों में भीड़ कम जरूर हुई है। लेकिन लाइन तो अब भी लगानी पड़ रही है। नगर के ज्यादातर सरकारी एटीएम में पैसा नहीं रहता है। जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सौरभ राय ने कहा कि सरकार ने डिजिटल ट्रांजेक्शन करने की बात कही थी ताकि कैश का प्रचलन कम हो सके। लेकिन ज्यादातर दूकानों पर स्वाइप मशीन न होने से लोगों को परेशानी होती है। जिसके कारण कार्ड के साथ ही लोगों को कैश भी अपने साथ रखना पड़ रहा है।
रविकांत त्रिपाठी ने कहा कि सरकार ने जिस मंशा के तहत नोटबंदी की थी वह पूरी नहीं हो सकी। लोगों ने इसे अच्छा कदम मानते हुए लाठियां तक खाई लेकिन सरकार के खिलाफ मुंह नहीं खोला। लेकिन सरकार अभी तक नोटबंदी के दौरान उत्पन्न हुई कैश की किल्लत को दूर नहीं कर सकी है।
राकेश सिंह चंदेल ने कहा कि कैशलेस ट्रांजेक्शन की योजना जानकारी के अभाव में फेल हो रही है। क्योंकि ज्यादातर लोगों को अभी तक इसके बारे में जानकारी नहीं है। सरकार को चाहिए कि पहले वह लोगों को प्रशिक्षित करे। क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं जो एंड्राएड सेट का उपयोग नहीं करते।