आजमगढ़। मेंहनगर तहसील के गुरेहथा गांव में 11.217 एकड़ बंजर भूमि पर कुछ लोगों ने सीरदार(पट्टा) दर्ज करा लिया था। शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के क्रम में यह मामला बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने पकड़ लिया। उन्होंने भूखंड के उक्त टुकड़े से सीरदार में दर्ज नामों को निरस्त कर ग्रामसभा के बंजर खातों में दर्ज करने की संस्तुति की।
सोमवार को जिलाधिकारी न्यायालय में उक्त मामले की सुनवाई हुई। बहस के दौरान विपक्ष की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ और उनकी ओर से कोई लिखित या मौखिक तर्क ही प्रस्तुत किया गया। पत्रावलियों के अवलोकन में जिलाधिकारी ने पाया कि खाते में दर्ज आदेश चकबंदी अधिकारी कम्हरिया-2 द्वारा 12 अप्रैल 1968 को जारी किया गया है। जिसके तहत गाटा संख्या 2042, 2043, 2049, 2050, 2052, 2054, 2057, 2056 और 2058 से ग्राम समाज का नाम खारिज करके परदेशी, रामसिंगार, चंद्रमा, रामजीत, रामजनम, हवलदार, प्रहलाद पुत्रगण रामदुलार के नाम बतौर सीरदार दर्ज करने का आदेश पाया गया। इस आदेश के तहत ग्राम समाज की 11.217 एकड़ भूमि ग्राम सभा के खाते से खारिज कर इनके नाम सीरदार दर्ज है। पत्रावली में सम्मिलित परिवार की रजिस्टर की नकल में यह पाया गया कि जिस समय यह विवादित आदेश जारी होना दर्शाया गया है। उस तिथि तक रामसिंगार और चंद्रमा नाबालिग थे। इनमें से हवलदार और प्रहलाद का जन्म भी नहीं हुआ था। इससे यह आदेश पूर्ण रूप से फर्जी और एंटीडेटेड था। जिलाधिकारी ने उक्त भूमि से परदेशी आदि का नाम निरस्त करते हुए उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।