फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कम हुआ पारे का तेवर पर उमस ने रखा बेहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। प्रचंड गर्मी और उमस से हर कोई बेहाल हो उठा है। सुबह सात बजे से ही मौसम में गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि बुधवार को जनपद का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 31 डिग्री दर्ज किया गया। घरों से बाहर निकले लोग पसीने से तर-बतर नजर आए।
विज्ञापन

जनपद में पड़ी रही उमस भरी भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। सूर्य की तीखी किरणें सुबह से ही बदन को झुलसाना शुरू कर दे रही हैं। बुधवार को जनपद के पारे में कमी दर्ज की गई, लेकिन उमस भरी गर्मी से इसके बाद भी राहत नहीं मिली। सुबह सात बजे से ही उमस शुरू हो गई। पंखे की हवा गर्मी से राहत दिलाने में नाकाम साबित हो रही थी। दोपहर के समय कूलर की हवा भी बदन को ठंडक पहुंचाने में नाकाम रही। कूलर की हवा भी जैसे लू को अंदर फेंक रही थी। तेज धूप और गर्मी के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे थे। जिसे कोई काम नहीं था उसने घरों में ही रहने में भलाई समझी। लेकिन जो किसी कार्य से घर से बाहर निकला वह जल्दी जल्दी सारे कार्यों को निपटा कर घरों में दुबक गया। जो लोग आफिस पहुंचे वह आफिस के ही होकर रह गए। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई। बाजारों में चहल पहल कम हो गई।

बढ़ते पारे के लिए मानव जिम्मेदार
आजमगढ़। पर्यावरणविद, कथाकार और समीक्षक डा. अखिलेश चंद्र ने कहा कि मानव ने अपने आसपास जो परिवेश विकसित किया है उससे उसका जीवन तो सहज हुआ है, लेकिन पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। वातावरण में बढ़ता तापमान भी मानव की क्रियाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। आजमगढ़ का 22 मई को तापमान 43 डिग्री पहुंच गया और अभी इसके और बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है। उत्तराखंड के जंगलों की आग भी सीधे तौर पर तापमान से ही जुड़ी हुई है। आग पर काबू न पाने के कारण तापमान और बढ़ रहा है। आधुनिक जीवन शैली में एयरकंडीशन, फ्रिज में प्रयोग होता क्लोरोफ्लोरोकार्बन भी इसका एक प्रमुख कारण है। आज की आधुनिक पीढ़ी पेड़ की छांव तो चाहती है लेकिन पेड़ लगाना नहीं चाहती, गाय का दूध तो पीना चाहती है, पर गाय पालना नहीं चाहती।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें