आजमगढ़। एक तरफ जिला प्रशासन आजमगढ़ विकास प्राधिकरण को कृषि क्षेत्र और ग्रीन लैंड क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर रोक लगाने का निर्देश देता है। लेकिन वहीं प्रशासन इन क्षेत्रों में एक से लेकर आधा बिस्वा जमीनों की बिक्री पर रोक नहीं लगा रहा है। जो प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
जनपद में 1985 का मास्टर प्लान लागू है। हालांकि यह प्लान 2011 में ही पूरा हो चुका है लेकिन नया मास्टर प्लान स्वीकृत न होने के कारण अभी पुराना मास्टर प्लान ही अधिकृत है। जिसके तहत नगर के चारों तरफ कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें कृषि क्षेत्र दर्शाया गया है। वहीं तमसा नदी के किनारे के क्षेत्र को ग्रीन लैंड क्षेत्र घोषित किया गया। इन क्षेत्रों में किसी प्रकार के आवासीय या व्यावसायिक भवनों का निर्माण नहीं हो सकता है। बावजूद इसके उक्त जमीन पर अवैध निर्माण हो रहा है। आज कृषि क्षेत्र और ग्रीन लैंड क्षेत्र में पांच विस्वा से कम जमीनों का बैनामा हो रहा है। लेकिन सबकुछ जानते हुए भी जिला प्रशासन मौन साधे हैं। क्योंकि उसके राजस्व की बढ़ोत्तरी जो हो रही है। अगर प्रशासन इन क्षेत्रों में आधा, एक या दो विस्वा जमीन की खरीद पर प्रतिबंध लगा दें तो ज्यादातर अवैध निर्माण अपने आप ही रूक जाएंगे। लेकिन नई महायोजना में कृषि क्षेत्र के ज्यादा इलाके आवासीय क्षेत्र घोषित हो सकते हैं। जिसे देखते हुए महायोजना लागू होने से पूर्व प्राधिकरण के कर्मचारी अवैध निर्माण कराकर अपनी जेबें भर रहे हैं।
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हमारे पास कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है जिससे हमें पता चले कि कौन सा क्षेत्र कृषि क्षेत्र और कौन सा क्षेत्र ग्रीन लैंड है। हमारे पास जो भी आता है हम उसकी रजिस्ट्री करते हैं। हमें तो राजस्व की प्राप्ति हो रही है। अब जो जानबूझकर ऐसे क्षेत्रों में खरीद रहा है वह समझे। -आरएस यादव, रजिस्ट्रार।