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जेल अधिकारियों कर्मियों पर गाज गिरनी तय

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बंदी रक्षक को गोली मारने के मामले में आरोपी को ढेर करने के बाद अब मामले में जेल अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरनी तय हो गई है। मामले में ये पुष्ट हो चुका है कि जेल के अंदर धन उगाही कर मोबाइल और बैरक आदि एलाट करने का खेल चल रहा है। इसकी पूरी रिपोर्ट डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज की ओर से आईजी जेल को भेजी गई है। इसमें सात से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। इसके अलावा एसपी की तरफ से भी कमजोरियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की तैयारी है। जेलर के साथ ही अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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18 अगस्त 2016 को जेल की 22 फुट ऊंची दिवारें फांदकर जेल से तीन हत्यारोपी और लूटेरे फरार हो गए। इस मामले में लापरवाही मिलने पर जेलर सहित कई बंदीरक्षक निलंबित कर दिए गए थे। जेल अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया गया। जेल में नया स्टाफ की तैनाती के बाद जेल की व्यवस्थाओं में सुधार की बजाय और बिगड़ गया है। जेल की खामियों को कई बार अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। जेल के भीतर बंदियों को बैरक दिलाने से लेकर भोजन आदि की सुविधा के लिए रिश्वत ली जाती है। वहीं 22 जनवरी की रात बंदी से मोबाइल छीनने वाले बंदीरक्षक को गोली मरवा दी गई।
हालांकि बंदी रक्षक अब खतरे से बाहर बताया जा रहा है। इस घटना के बाद डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज यादुवेंद्र शुक्ला जांच करने पहुं्चेे। जांच में पता चला कि बंदीरक्षक मानसिंह यादव जेल के भीतर मोबाइल चलाने के खिलाफ था। जबकि जेल के कुछ अधिकारी और बंदीरक्षक रिश्वत लेकर मोबाइल चलवाते हैं। इसी मिलीभगत का परिणाम रहा कि 23 और 24 जनवरी की रात एसपी के ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान 18 मोबाइल और पांच सिमकार्ड बरामद हुआ था। डीआईजी ने इसके लिए सात से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों को दोषी पाया है।
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जेल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के लिए जेल के सात से अधिक अधिकारी और कर्मचारी, बंदी रक्षक जिम्मेदार हैं। इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए आईजी जेल को रिपोर्ट भेज दी गई है। - यादुवेंद्र शुक्ला, डीआईजी जेल, गोरखपुर रेंज
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जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जेल के भीतर मोबाइल सहित अन्य सामाग्रियों का प्रवेश हो रहा है। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जेल के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - अजय कुमार साहनी, एसपी
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