बज्मे गुलशने अदब के तत्वाधान में शनिवार की रात मंगलबाजार में कवि गोष्ठी व मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने कविताओं की प्रस्तुति कर देर रात तक कई रंग बिखेरकर लोगों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत संयोजक रफीक फूलपुरी ने नाते पाक से किया।
कवि गोष्ठी के दौरान मुख्य अतिथि जमील भादवी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उर्दू जुबान बहुत खूबसूरत है। इस जुबान में लिखी कविताएं लाजवाब होती हैं। मुशायरे की शुरुआत शायर मिसदाक आजमी ने अपनी रचना जब से हुआ हूँ आप की फ़ैजय़ाब कि अब किसी गुनाहों में लज्जत नहीं मिलती से किया। रफीक आजमी ने कभी मकान-घर कच्चे थे, मगर तब लोग कितने अच्छे थे, सुना कर खूब वाहवाही लूटी। तस्कीन आजमी ने वर्तमान हालात को अपने कविता के माध्यम से पेश किया। मैकस आजमी ने हिदुस्तान की आन बान शान पर आधारित नज्म पेश किया तो तालियों से हाल गूँज उठा। जमील आजमी ने माँ की ममता पर शेर पेश किया। अन्य शायरों में तस्कीन फुलपुरी, मुख्तार आजमी, सैयबा शेख, आफताब मुजाहिद, शबा नजऱी, गैवी जौनपुरी, मंसूर आजमी, जमील आजमी, तासिउद्दीन आजमी शामिल रहे। देर रात तक लोगों ने मुशायरे का आनंद उठाया। इस दौरान दीपक, दानिश, नैयर, सखवात, आफताब, विष्णु, अमरनाथ बरनवाल, रामआसरे वर्मा, संतोष, मनोज मोदनवाल समेत काफी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।