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तीन तलाक पर नहीं ली गई उलेमाओं से राय

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मुहल्ला पहाड़पुर स्थित एक मिनारा मस्जिद में तीन तलाक विषय को लेकर रविवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मौलाना ताहिर मदनी ने कहा कि कुरआन और हदीस में कही भी तीन तलाक का जिक्र नहीं किया गया है। तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामिक स्कालर और उलेमाओं से राय लेने की बात कही थी। ऐसा न करके लोक सभा में बिल को पास कराया जाना कोर्ट की अवमानना है। तीन तलाक के नाम पर राजनीति करना जायज नहीं है।
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उन्होंने कहा कि समाज में अशिक्षा के कारण लोग कुरआन में बताए गए तरीके का मतलब नहीं समझ पाने के कारण नासमझी कर बैठते है। जिसके कारण लोगों को इस्लाम को बदनाम करने का मौका मिल जाता है। अगर लोग कुरआन को समझ जाए तो तलाक जैसी स्थिति ही नहीं पैदा होगी। हम सभी उलेमाओं, इस्लामिक स्कालरों का यह कर्तव्य है कि गांव-गांव जाकर इसके बारे में जानकारी दें। शेरवां सरायमीर के मुफ्ती अशफाक ने कहा कि निकाह औरत और मर्द की जिंदगी का वह अहम हिस्सा है जिसके बिना दोनों अधूरे है। उन्होंने कहा कि जब अल्लाह ने कुरआन के जरिए हमें जिंदगी जीने का तरीका बता दिया है तो फिर हम गुमराही के रास्ते पर क्यों चल रहे है। सिर्फ मर्द को ही अच्छे काम के लिए जन्नत नहीं मिलती बल्कि औरत भी इसकी हकदार होती है। इस्लाम में औरत को ऊंचा मुकाम दिया है। कुरआन में कही भी तीन तलाक का जिक्र नहीं पाया जाता है। इसे तो राजनीत करने वाले अपने फायदे के लिए उछालकर इस्लाम को बदनाम करना चाहते है। आज हम सभी को गुमराह लोगों को तीन तलाक के बारे में जानकारी देने की जरुरत है। गोष्ठी का संचालन मौलाना अरशद ने किया। इस मौके पर जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इंतखाब आलम कासमी, सभासद शहजाद कुरैशी, रहमत अली रहमानी, जमील अहमद, इलियास अहमद, डा. शाहिद कलीम, कारी सईद, सलमान कुरैशी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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