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दहेज लोभी मां और बेटे को 12 साल की कैद

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आजमगढ़। अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार वर्मा की अदालत ने शनिवार को दहेज हत्या के आरोपी विवाहित के पति को बारह वर्ष और सास को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों को 12-12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। प्राप्त अर्थदंड की धनराशि का आधा हिस्सा विवाहिता के पिता को दिया जाएगा। इसी मामले में आरोपी विवाहिता की ननद पुष्पा को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के भाव में बरी कर दिया।
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जिला मऊ के रानीपुर गांव निवासी प्रेमचंद की लड़की संतबाला उर्फ शांतिबाला की शादी छह जून 2013 को आजमगढ़ जिले के तरवां थाना क्षेत्र के बांसगांव निवासी दीपक पुत्र होरी लाल के साथ हुई थी। 20 जुलाई 2014 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पिता प्रेमचंद ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया कि मेरी बेटी के ससुराल के लोग दहेज की मांग को लेकर तरह-तरह से उसे प्रताड़ित करते थे। घटना के दिन ससुराल वालों ने गला दबाकर संतबाला की हत्या कर दी। इस मामले में तरवां थाना पुलिस ने विवाहिता के पति दीपक, सास शांति देवी, ननद पुष्पा के विरुद्ध अरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सत्र परीक्षण के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव ने कुल 11 गवाहों को पेश किया और तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद विवाहिता के पति और सास को दहेज हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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