आजमगढ़। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संध्या चौधरी की अदालत ने दहेज हत्या के जुर्म में विवाहिता के पति और देवर को दोषी पाते हुए शुक्रवार को उम्र कैद की सजा सुनाई, साथ ही दोनों को कुल पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड की धनराशि का भुगतान न करने पर अभियुक्तों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसी मामले का एक अन्य आरोपी विवाहित के ससुर आत्मा राम गोंड़ की मुकदमा कार्रवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।
महराजगंज थाना के भीलमपुर गांव निवासी चंद्रशेखर गोंड की बहन नीलम की शादी नौ जून 2011 को कंधरापुर थाना के आखापुर गांव के मूल निवासी राधेश्याम पुत्र आत्मा राम गोंड़ के साथ शहर थाना कोतवाली स्थित कांशी राम आवास कालोनी 58/694 में हुई थी। 29 जुलाई 2011 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में चंद्रशेखर गोंड ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में आरोप लगाया कि शादी के बाद उसकी बहन विदा होकर ससुराल गई तो उसके घर वाले दहेज में टीवी और पचास हजार रुपये की मांग करने लगे। यह सिलसिला चलता रहा। इसी मांग को लेकर घटना के दिन विवाहिता नीलम को उसके ससुराल वाले जला कर मार डाले। इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद विवाहिता के पति राधेश्याम, ससुर आत्मा राम और देवर श्याम के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षरण के दौरान शासकीय अधिवक्ता विनोद यादव ने अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल आठ गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों में विवाहिता के भाई चंद्रशेखर गोंड, प्रदीप गोंड, छोटे लाल शर्मा, रामधारी यादव, रीता देवी, रामहित गोंड, डा. विजय कुमार सिंह, सीओ हरेंद्र कुमार शामिल है। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद विवाहिता के पति और देवर को दहेज हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।