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18 दिन बीते नहीं हैंडओवर हो सका फूलपुर का 100 बेड अस्पताल

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आजमगढ़। सपा सरकार के कार्यकाल में फूलपुर तहसील मुख्यालय पर सीएचसी परिसर में 100 शैया युक्त उच्चीकृत चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव 2016 में हुआ था। सपा के क्षेत्रीय विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव के प्रयास से सरकार ने हरी झंडी देने के साथ ही इसकी लागत 23 करोड़ की लागत से 2018 में ही पूरा होना था। लेकिन अभी तक यह निर्माणाधीन है। 13 मई को डीएम ने इसे 15 दिन में हैंडओवर करने का निर्देश दिया था लेकिन हैंडओवर की बात दूर अब तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
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क्षेत्रीय जनता की मांग पर विधायक श्यामबहादुर सिंह यादव के प्रयास से सपा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2016 में इस ट्रामा सेंटर की स्थापना के लिए स्वास्थ्य विभाग से प्रस्ताव मांगा था। शुरुआती दौर में निर्माण कार्य तेजी से चला। कई बार तो धनाभाव के कारण काम को रोकना पड़ा। इससे क्षेत्र की जनता की मंशा पर पानी फिर गया। सीएचसी फूलपुर में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराने के पीछे मकसद था कि हजारों गांव के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना था। क्योंकि आकस्मिक और गंभीर बीमारियों के दौरान ट्रामा सेंटर में बेहतर इलाज हो सके। स्वास्थ्य विभाग से किए गए प्रस्ताव को सपा सरकार ने हरी झंडी देने का साथ 23 करोड़ रुपया की स्वीकृति भी प्रदान की थी। वर्ष 2016 में अनुबंध के बाद कार्यदायी संस्था आवास विकास को टेंडर किया गया। लेकिन बजट के अभाव में पहला तल का स्लेप न लगने से काम ठप हो गया था। कई माह काम बंद रहने के के बाद दोबारा बजट जारी हुआ तो दूसरे तल की छत लग गई। अब पूरी बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। लेकिन बहुत से कार्य अभी भी अधूरे हैं।
आवास विकास के सहायक अभियंता अजनि कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट बजट के अभाव में देर से तैयार हो रहा है। कास्ट में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले यह 23 करोड़ में बनना था लेकिन अब इसकी लागत बढ़कर 28 करोड़ हो गई है। पिछले एक साल से कोविड की वजह से काम बाधित रहा। बीच- बीच में मजदूर घर चले जा रहे हैं। ट्रामा सेंटर के लिए अब लगभग 9 करोड़ रुपये रिलीज होने है इसकी शासन स्तर पर जांच भी चल रहीं है। अभी इसे पूरा होने में कम से कम एक महीने लगेंगे। वहीं सीएमओ डॉ. आईएन तिवारी ने बताया कि कार्यदायी संस्था द्वारा इसका निर्माण 2018 में ही पूरा किया जाना था लेकिन बजट और कोरोना के कारण इसमें देरी हुई। इनके द्वारा हर बार पूछे जाने पर 15 दिन का समय मांगा जा रहा है लेकिन अभी तक इसे हैंडओवर नहीं किया गया। अगर यही हाल रहा तो इसकी शिकायत शासन से करनी होगी।
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