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गलत कार्य करने पर फंसे गुरुजी, गई नौकरी

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जनपद में फर्जी अंकपत्र और कूटरचना के सहारे नौकरी करने का यह पहला मामला नहीं है जब किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई हो। लेकिन शिक्षा विभाग में ऐसे अनेक मामले हैं जिनमें पूूर्व में ही कार्रवाई हो चुकी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई इस कार्रवाई से इस तरह से नौकरी करने वाले शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि जांच में दोषी मिले अन्य शिक्षकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक चुकी है।
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केस एक
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय ने मंगलवार को जिन तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त की। उनमें एक है यादव उषा। जिन्होंने महाराष्ट्र बोर्ड से उत्तीर्ण इंटरमीडिएट का अंक पत्र लगाकर तहबरपुर विकास खंड के बड़सरा खालसा स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक की नियुक्ति प्राप्त कर ली। जब इस अंक पत्र की जांच महाराष्ट्र बोर्ड से कराई गई। जांच रिपोर्ट में महाराष्ट्र बोर्ड ने उनके अंकपत्र को फर्जी बताया। इस रिपोर्ट के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उषा यादव को बर्खास्त करते हुए वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा और खंड शिक्षा अधिकारी तहबरपुर को उनके द्वारा आहरित की गई धनराशि के रिकवरी का निर्देश दिया।
केस दो
बर्खास्त हुई दूसरी शिक्षक हैं सीमा। इनके द्वारा भी महाराष्ट्र बोर्ड के इंटरमीडिएट उत्तीर्ण का अंकपत्र लगाकर बिलरियागंज विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय मठ विसंभर में सहायक अध्यापक की नौकरी पा ली गई थी। प्रीतम पांडेय की शिकायत पर हुई जांच में जांच समिति ने इनके अंकपत्र को फर्जी बताया। जब इसकी जांच महाराष्ट्र बोर्ड से कराई गई तो इनका भी इंटरमीडिएट का अंकपत्र फर्जी पाया गया। जिसकी रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त करते हुए वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा और खंड शिक्षा अधिकारी बिलरियागंज को उनके द्वारा आहरित की गई धनराशि के रिकवरी का निर्देश दिया।
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केस तीन
बर्खास्त हुए तीसरे शिक्षक हैं छोटेलाल पुत्र बलिकरन सिंह। इनके द्वारा श्री गांधी पीजी कालेज मालटारी, आजमगढ़ से उत्तीर्ण स्नातक के अंकपत्र को लगाकर अजमतगढ़ विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय बलुआ में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल की गई थी। शिकायत के बाद जांच समिति ने इनके अंकपत्र को फर्जी करार दिया था। इसकी जांच के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं महाविद्यालय पहुंचे और गोरखपुर विश्वविद्यालय से अंकपत्र की जांच कराई। जांच में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय ने उनके अंकपत्र को फर्जी करार दिया। इस आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनकी नियुक्ति को निरस्त करते हुए वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा और खंड शिक्षा अधिकारी अजमतगढ़ को उनके द्वारा आहरित की गई धनराशि के रिकवरी का निर्देश दिया।
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इनसेट
शिकायत के बाद उक्त मामले की जांच डीएसटीओ डा. अर्चना सिंह और एडीएसटीओ सुनील सिंह को मिली थी। जांच में छह शिक्षकों के अंक पत्रों के फर्जी होने की रिपोर्ट सौंपी थी। तब जिलाधिकारी के निर्देश पर पांच शिक्षकों के ऊपर एफआईआर हुआ था। जिसमें यादव उषा, छोटेलाल, प्रभाकर, रमेश और रवि राय शामिल थे। अभी सीमा के ऊपर एफआईआर होना था लेकिन मामला कोर्ट में चला गया और सीमा के खिलाफ एफआईआर नहीं हो सकी। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि मुझे तो यही मालूम था कि सबके ऊपर पहले से ही एफआईआर दर्ज है। लेकिन अगर कोई बच गया है तो मैं लखनऊ से लौटते ही एफआईआर दर्ज कराऊंगा।
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