अहरौला। श्री श्री 1008 दुर्वाषा महामंड़लेश्वर ब्रह्मलीन मौनी बाबा का निर्वाण दिवस गहजी महिपालपुर रामजानकी आश्रम पर शनिवार को मनाया गया। इस दौरान श्रद्घालुओं ने वहां आयोजित एक दिवसीय भागवत कथा के साथ ही भंड़ारे में प्रसाद ग्रहण किया।
सर्वप्रथम श्रद्घालुओं ने मौनी बाबा के चित्र पर दीप जलाकर और पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद आयोजित भंड़ारे में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया। मानस मर्मज्ञ पंडित कौशल किशोर ने भागवत कथा का वाचन करते हुए कहा की जिस तरह से पेड़ पौधे बसंत आने पर पतझड़ को प्राप्त हो जाते हैं और नए पत्ते को धारण करते हैं। उसी तरह से आत्मा भी पुराने शरीर को छोड़ नए शरीर को धारण करती है। आत्मा अजर अमर है। रामजानकी सिद्ध पीठ के महंथ हरिप्रसाद दास ने संत समाज और गणमान्य लोगों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य हरिनारायण सिंह, प्रबंधक फौजदार सिंह, ड़ा. दिवाकर सिंह, समाज सेवी लक्ष्मी चौबे, हरिकेश चौबे, अनुराग चौबे, रामनेत सिंह, सुधाकर चौबे आदि उपस्थित थे।
मंगलकारी प्रज्ञा पुरूष थे मौनी बाबा
आजमगढ़। संस्कृति विकास मंच के तत्वावधान में शनिवार को रैदोपुर में मौनी बाबा रामलाल दास की प्रथम पुण्यतिथि और श्रद्वांजली सभा साहित्यकर प्रोफेसर प्रभुनाथ सिंह मंयक की अध्यक्षता में मनाई गई। उन्होंने ने कहा कि मौनी बाबा मंगलकारी प्रज्ञा पुरुष थे। जो अपनी चमत्कारी सिद्वियों के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य चरित्र को अपने विराट जीवन व्यवहार के द्वारा जनगण को उल्लसित किए। सरलता, सहजता, वाणी की मृदुलता उनके दिव्य व्यक्तित्व के अलंकार थे। कथावाचक बाल व्यास पं. कौशल किशोर जी महराज ने कहा कि उनके चमत्कारी व्यक्तित्व को देखकर महर्षि वशिष्ठ का त्रिकाल दर्शी स्वरुप आभाषित होता था। इस मौके पर पं. श्याम सुंदर त्रिपाठी, राधेश्याम दुबे, विपुल त्रिपाठी, घनश्याम तिवारी, सत्यम गुरु आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पं. सुभाष चंद्र तिवारी कुंदन ने किया।