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सभी रूठों को मनाने में नाकाम रही पार्टियां

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आजमगढ़। नगर निकाय चुनाव में पार्टियों द्वारा टिकट बंटवारे के बाद उपजे घमासान को शांत कराने में जहां कुछ पार्टियां कामयाब रहीं। वहीं कुछ पार्टियों मतभेदों को दूर करने और अपनों को मनाने में नाकाम रही। इसका परिणाम रहा कि पार्टी का विद्रोह कर कई लोगों ने नामांकन दाखिल किया।
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आजमगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में टिकट को लेकर सपा, बसपा और बीजेपी में सबसे ज्यादा मारामारी थी। पार्टियों की ओर से काफी देर से प्रत्याशियों की घोषणा की गई। टिकट के बंटवारे को लेकर पार्टियों में विरोध के स्वर भी फूटने लगे। कई लोग बगावत पर भी उतारू हो गए। सपा और कांग्रेस में तो यह गतिरोध नामांकन बाद सामने नहीं आया, लेकिन बसपा और भाजपा का मनमुटाव खुलकर सामने आ गया। बसपा से पूर्व में पालिकाध्यक्ष रह चुकी शीला श्रीवास्तव को जब पार्टी ने इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया तो उन्होंने निर्दल प्रत्याशी के रूप में सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर नामांकन किया। वहीं, भाजपा से बगावत का बिगुल फूंक चुके निवर्तमान अध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल के पुत्र अभिषेक जायसवाल दीनू को मनाने में भी पार्टी नाकाम रहे। सोमवार को अभिषेक जायसवाल दीनू ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नामांकन किया। हालांकि अभी अपनों को मनाने में दो दिन का वक्त और है। इन दो दिग्गजों के मैदान में आने से नगरपालिका आजमगढ़ का समर काफी रोचक हो गया है।
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