फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारी-बारी इतिहास रच गंवाई दोनों सीट

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक बार सदर लोकसभा सीट और दूसरी बार लालगंज लोकसभा सीट पर चुनाव जीतकर इतिहास रची थी, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। यहां भोजपुरी फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ का भी जादू नहीं चल पाया।
विज्ञापन

पुराने रिकार्ड पर गौर करें तो वर्ष 2009 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा सदर लोकसभा सीट के लिए पार्टी प्रत्याशी के रूप में बाहुबली रमाकांत यादव को चुनाव मैदान में उतारा। रमाकांत की हवा के आगे सपा और बसपा के प्रत्याशी नहीं टिक पाए और रमाकांत यादव सदर लोकसभा सीट से भाजपा के लिए चुनाव जीतकर इतिहास रचने का काम किया। साथ ही सांसद के तौर पर पहली बार खाता भी खुला। जबकि भाजपा प्रत्याशी नीलम सोनकर बसपा के डा. बलिराम से चुनाव हार गई। रमाकांत की इस जीत के बाद पार्टी के लोग दोनों ही सीट पर कब्जा जमाने की रणनीति तैयार करते हुए वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सदर सीट से रमाकांत यादव और लालगंज से नीलम सोनकर पर दोबारा दांव आजमाया। सदर सीट से रमाकांत के विपक्ष में सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव मैदान में उतरे, जबकि लालगंज से नीलम के विरोधी के तौर पर बसपा ने डा. बलिराम और सपा ने पूर्व विधायक बेचई सरोज पर दाव खेला। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरे देश में सुनामी चल रही थी। जिसका परिणाम रहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की किसी तरह से चुनाव जीतकर अपनी नाक बचाए और रमाकांत यादव चुनाव हार गए। जबकि लालगंज से नीलम सोनकर को मोदी लहर का फायदा हुआ और वह चुनाव में बाजी मार कर भाजपा के लिए यहां से इतिहास रचने का काम किया। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने रमाकांत को दरकिनार कर भोजपुरी के सिने स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ और लालगंज में नीलम सोनकर पर दांव आजमाया। लेकिन इस बार जिले में मोदी फैक्टर काम नहीं किया और दोनों सीटें सपा-बसपा गठबंधन के खाते में चली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें