आजमगढ़। गैर जनपदों और प्रांतों में फंसे श्रमिकों और छात्रों के जनपद पहुंचने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को अपराह्न दो बजे तक 10 बसों से कुल 152 मजदूर और छात्र जनपद आए। जिन्हें जांच के बाद क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया।
डीएम एनपी सिंह ने बताया कि सोमवार की रात 12 जिे से अपरान्ह दो बजे तक जनपद में कुल 152 छात्र व श्रमिक परिवहन निगम की 10 बसों माध्यम से विभिन्न प्रदेशों व जनपदों से आए हैं। जिसमें मध्य प्रदेश से सात, पंजाब से नौ, राजस्थान से 15, महाराष्ट्र से 31, गुजरात से 39, गौतमबुद्ध नगर से 38 तथा हाथरस से 13 यात्री आजमगढ़ रोडवेज पर आए। सभी को ब्रेकफास्ट व लंच पैकेट उपलब्ध कराया गया एवं उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। उसके बाद उन्हें संबंधित तहसील मुख्यालयों पर बसों के माध्यम से भेजा गया।तहसील सदर में 22, सगड़ी में 33, लालगंज में 15, फूलपुर में 21, निजामाबाद में 20, मेंहनगर में सात, बूढ़नपुर में 23 तथा मार्टीनगंज में 11 छात्रों व श्रमिकों को भेजा गया। सभी को जांच के बाद क्वारंटीन सेंटर में भर्ती कराया गया है। जहां 14 दिन रहने के बाद उन्हें घर जाने की इजाजत दी जाएगी।
दीदारगंज थाना क्षेत्र निवासी सुजीत कुुमार ने बताया कि हम छत्तीसगढ़ में रहकर फर्नीचर बनाने का कार्य करते हैं। लाक डाउन के बाद से काम मिलना बंद हो गया। पहले सोचा खुल जाएगा इसलिए जो कुछ पैसा हमारे पास था उससे पेट भरते रहे। लेकिन जब लाक डाउन आगे बढ़ गया तो घर जाने का निर्णय लिया। वहां की सरकार ने हमें सोनभद्र बार्डर पर छोड़ा वहां से परिवहन निगम की बस से हम आजमगढ़ पहुंचे हैं।
दीदारगंज थाना क्षेत्र निवासी रामकेश ने बताया कि वह हरियाणा में रहकर पेंटिंग का काम करते थे। लाक डाउन के बाद सरकार की ओर से राशन उपलब्ध कराया जाता था लेकिन 100 लोगों में सिर्फ 25 को ही राशन मिलता था। सरकार ने पैसे देने के लिए आवेदन कराया लेकिन वह भी नहीं मिला। पैसा न होने पर साइकिल से ही वहां से निकल पड़ा। रास्ते में मंदिरों पर भोजन मिल जाता था। कई जगहों पर पुलिस ने डंडे भी मारे लेकिन किसी तरह से लखनऊ पहुंचा और वहां से बस से आजमगढ़ पहुंचा।
आनिजामाबाद निवासी संतोष सिंह राजस्थान में बढ़ई का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि जब लाक डाउन हुआ तो काम मिलना बंद हो गया और हम घर में कैद हो गए। जो पैसे थे वह खाने पीने में खर्च हो गए। हालांकि सरकार की ओर से राशन मिलता था। किसी तरह से काम चल रहा था लेकिन जब सरकार ने लोगों को लाने की ठानी तो राजस्थान सरकार ने हमें यूपी बार्डर तक पहुंचाया। वहां से परिवहन निगम की बस से हम आजमगढ़ आए हैं। यहां आकर बहुत सुकून मिला।
लालगंज तहसील निवासी राजित अली ने बताया कि वह अलीगढ़ में रहकर मार्केटिंग का कार्य करते थे। लाक डाउन के कारण उनके पास जो पैसे थे वह खर्च हो गए। अलीगढ़ में केस बढ़ने लगे और पैसे न होने पर घर जाने का निर्णय लिया। कोई साधन न मिलने पर पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में ट्रैक्टर और डीसीएम का सहारा लेकर किसी तरह से हरदोई पहुंचा। वहां से बस मिली और आजमगढ़ आ गया। लेकिन यह दिन पूरे जीवन भर याद रहेगा।