आजमगढ़। शहर के नेहरू हॉल में गुरुवार को गाथांतर सम्मान समारोह एवं कहानी पाठ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। महिलाओं की ओर से आयोजित ये पहला साहित्यिक कार्यक्रम रहा। देश के विभिन्न भागों से आई राष्ट्रीय पहचान की महिला साहित्यकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया। कार्यकम के दौरान जहां महिला साहित्यकार सम्मानित की गईं। वहीं, संभावना कला मंच गाजीपुर के कलाकारों ने कविता चित्र प्रदर्शनी लगाई।
मुख्य अतिथि कथाकार पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि सभी मातृ भाषाएं आगे बढ़ेगी तो राष्ट्र भाषा खुद मजबूत हो जाएगी। राष्ट्र भाषा के आड़े मातृ भाषा नहीं आती। साहित्य अकादमी के पुरस्कारों की श्रेणी में भोजपुरी भाषा की रचनाएं न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने कहा कि स्त्री लेखन ने महिलाओं के मन की बात को विश्व पटल पर पहुंचाया है। साहित्यकार सोनी पांडेय ने कहा कि आजमगढ़ साहित्य और संस्कृति की उर्वरक जमीन रही है।
इस दौरान पालिका अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव और साहित्यकार सोनी पांडेय ने गाथांतर सम्मान 2015 पद्मश्री उषा किरण खान को, गाथान्तर सम्मान 2016 प्रो.चन्द्रकला त्रिपाठी को, गाथांतर सम्मान 2017 किरण सिंह और पत्रकार गीताश्री को उपन्यास ‘हसीनाबाद’ के लिए दिया गया। किरण सिंह ने बड़े भावनात्मक तरीके से संझा कहानी सुनाई।
संभावना कला मंच गाजीपुर के कलाकारों ने प्रख्यात कवियों की रचनाओं के साथ पोस्टर पर चित्र उकेर कर प्रदर्शित किया। संचालन गाजियाबाद की कवयित्री मृदुला शुक्ला और अनामिका सिंह पालीवाल ने आभार व्यक्त किया। प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, प्रभु नारायण पांडेय, डॉ. मधु नजमी, निरुपमा पाठक, पूनम सिंह, अंशुमाला, अनीता साईलेस, कंचन यादव, रानी सिंह, रविन्द्र राय, अभिषेक पंडित, अनामिका प्रजापति, अंशुमाला, अरविंद सिंह मौजूद रहे।