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मस्तिष्क ज्वर से बचाने को गांव-गांव तलाशे जाएंगे बच्चे

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आजमगढ़। मस्तिष्क ज्वर जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए बच्चों की तलाश में स्वास्थ्य महकमा घर-घर पहुंचेगा। अप्रैल-मई में चलने वाले 15 दिन के विशेष अभियान में 502 टीमें लगाई जाएंगी। एक से 15 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा।
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सूबे में 38 जिलों को जो तराई क्षेत्र से संबंधित हैं उन्हें मस्तिष्क ज्वर बीमारी से प्रभावित माना गया है। जिसमें आजमगढ़ भी शामिल हैं। 2008 से लगातार मस्तिष्क ज्वर से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। टीकाकरण से अछूते बच्चों को लाभान्वित करने के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रम की रूप रेखा तय करने के लिए हाल ही में लखनऊ में 38 जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को बुलाकर उन्हें योजना समझाई गई। योजना के अनुसार आजमगढ़ से अप्रैल-मई माह में 15 दिन का विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान में 502 टीमें लगाई जाएंगी। विभाग की माने तो जनपद में लगभग 92 हजार बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अभी तक टीके का लाभ नहीं मिला है। टीकाकरण के लिए 100 सुपरवाइजरों के साथ 80 चिकित्सकों की टीम लगेगी।

खसरा और रुबेला से भी बचाने की तैयारी
आजमगढ़। खसरा और रुबेला जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए जिले में पहली बार विशेष अभियान चलाया जाएगा। शासन ने सितंबर माह में इस अभियान को चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत पहली बार जिले में एक से 15 साल के बच्चों को चिह्नित कर इन्हें मिजिल्स और रुबेला की एमआर वैक्सीन लगाई जाएगी। इस बीमारी से शुरुआत में प्रभावित व्यक्ति को थकान, बुखार, खांसी, लाल आखें और मुंह के अंदर सफेद दाग होते हैं। इसके 3-7 दिन बाद त्वचा पर लाल धब्बेदार चकत्ते हो जाते हैं। इससे मृत्यु भी हो सकती है।
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शासन से मस्तिष्क ज्वर और खसरा-रुबेला से बच्चों को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान की मंजूरी मिली है। मस्तिष्क ज्वर के लिए अभियान अप्रैल-मई और खसरा-रुबेला के लिए सितंबर में अभियान चलाया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। -डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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