आजमगढ़। पालिका की दहलीज पर ही दर्जनों गांव जलनिकासी और सड़कों की समस्या को लेकर तरस रहे हैं। कई गांव तो पालिका कार्यालय से मात्र 500 मीटर की दूरी पर हैं, फिर भी निकाय में नहीं हैं। इसी कारण यहां की आबादी कहने को तो शहर में आती है, लेकिन विकास नाम से कोसों दूर है। नगर से सटे होने के बाद भी यह आज तक स्ट्रीट लाइट, सड़क, नाली, जल निकास आदि की समस्या से जूझ रहे हैं। नई नगरपालिका अध्यक्ष के आने के बाद इन ग्रामीणों की उम्मीदें एक बार फिर हिलोरे मार रही हैं कि जल्द ही उनके गांव को नगरपालिका में शामिल कर लिया जाएगा।
बताते चलें कि नगर से सटे बलरामपुर, करतालपुर, मुनरासराय, हथिया, जाफरपुर, मुंडा, कोल पांडेय, कोल घाट, लक्षिरामपुर, देवपार, सराय मंदराज, खैरातपुर, पठखौली आदि गांव नगरपालिका क्षेत्र से सटे हुए हैं। जहां पर नगरपालिका की सीमा खत्म होती है वहीं से यह गांव शुरू होते हैं। लेकिन इन गांवों को आज तक शहर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। जिसके कारण आज भी इन गांवों के लोग बिजली, पानी, नाली, सड़क, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट आदि की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इन गांवों से आगे तक अवैध रूप से कॉलोनियों का निर्माण चारों तरफ से हो गया है। लेकिन इन कॉलोनियों में भी पानी के निकास, प्रकाश, रोड, नाली आदि की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्राम पंचायत होने के कारण नगरपालिका यहां विकास के कोई कार्य नहीं कराती है। पिछले अध्यक्ष के कार्यकाल में ही इन 46 गांवों को पालिका में शामिल होने का प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन राजनीति का कारण बोर्ड में पास नहीं हो पाया। इस प्रस्ताव को शासन को भेजने की तैयारी थी, लेकिन निकाय चुनाव की आचार संहिता लग गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब नगरपालिका में नई सरकार बनने के बाद इन गांवों के लोगों में अब फिर से नगरपालिका में शामिल होने की उम्मीद जग गई है।
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कोल घाट निवासी अजय कुमार पांडेय का कहना है कि हमारा गांव शहर से सटा हुआ है लेकिन सुविधा के नाम पर यहां कुछ नहीं है। न तो घरों से निकलने वाले पानी के निकास की व्यवस्था है। न तो कूड़ा निस्तारण की लोग घर से निकलने वाले कूड़े को घर के सामने ही जला देते हैं।
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कोल घाट निवासी विनय गुप्ता का कहना है कि हम खुद को शहर में मानते हैं लेकिन शहरी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। हमारा गांव नगरपालिका में नहीं है। जिसके कारण यहां न तो नाली है और ना ही कूड़े के उठान की कोई व्यवस्था। शहर से सटे होने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
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कोल घाट निवासी अशोक कुमार का कहना है कि पानी के निकास की व्यवस्था न होने से बहुत से लोग रास्ते पर ही घर का पानी बहाते हैं। अगर हमारा गांव भी नगरपालिका में होता तो यहां नाली आदि की व्यवस्था होती। वैसे तो हम शहर से मात्र कुछ मीटर की दूरी पर निवास करते हैं लेकिन सुविधा नहीं मिलती है।
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कोल घाट निवासी सुरेश कुमार का कहना है कि हमें नव निर्वाचित पालिकाध्यक्ष से बहुत उम्मीदें हैं। हमें विश्वास है कि वह नगरपालिका क्षेत्र का विस्तार करते हुए हमारे गांव को भी नगरपालिका क्षेत्र में शामिल कराएंगी। जिससे हमारे गांव का भी चौमुखी विकास होगा।
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शहर से सटे गांवों को नगरपालिका में शामिल करने के लिए उनके स्तर से हर संभव प्रयास किया जाएगा। इसके लिए वह बोर्ड की पहली बैठक में ही इसका प्रस्ताव रखेंगी। प्रस्ताव पास होने के बाद इसे शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद इन गांवों का भी शहर की तर्ज पर विकास किया जाएगा।
शीला श्रीवास्तव, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष।