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आबादी से 100 मीटर दूर है घाघरा नदी

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लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली घाघरा नदी ने घटने के साथ ही कटान में इजाफा कर दिया है। इसके कारण बाढ़ और कटान पीड़ितों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। ग्रामीणों की जमीन घाघरा की लहरों में विलीन होती जा रही है। 24 घंटे में घाघरा ग्रामीणों की 20 बीघे जमीन काट चुकी था।
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प्रत्यक्षदर्शी लालबहादुर और रामचंद्र ने बताया कि घाघरा नदी की लहरें जब-जब उफनती हैं खेती वाली जमीन काटकर धारा में समा जाती है। तटवर्ती गांव का वजूद मिटाने पर आतुर है। पिछले 24 घंटे में हरैया ब्लॉक के अचलनगर गांव के राम सरन दूबे के पुरवा के राम करन, मेवाती, बसंत, हीरा, देवारा अचलनगर के रामधारी, अनिरुद्ध, विनोद, पुर्नवासी, विक्रम, अवधेश, काशी, शिवबचन, रामशब्द, कुमार, दलीप, शेषनाथ, कलावती, विकाश, श्रीभागवत, देवारा गोपाल दूबे के पतिराम, फूलबदन, चंद्रभान, रामकरन, गनपति, देवारा गरीब दूबे के राम अवध, चंद्रभान, झब्बर, श्याम जीत, कुमार, राम विनय, धर्मदेव, रविंदर, मानसिंह, कतवारु, बहादुर, लालचंद आदि की 20 बिघे जमीन काट चुकी है। मुराली के पुरवा के 14 आशियानों का आस्तित्व पहले ही घाघरा में समा चुका है। रामचंद्र, रामअवध, राम अधार, तीरथ, अयोध्या, परसन, पूजन, लालधर, देवकी, लालबचन, राधेश्याम, रामबृक्ष आदि ने अपना सामान समेट कर 500 मीटर दूर अपना आशियाना बनाया है। अब त्रिलोकी के पुरवा के पास कटान तेज गो गया है। घाघरा की लहरे 19 आशियानों को अपना निशाना बनाने को आतुर हैं। पानी आबादी से मात्र 100 मीटर दूर है। यहां के लालचंद, त्रिलोकी, श्रीकांत, संजय, सरवन, महेंदर, रजिंदर, बीरबल, श्यामधारी , भोंभल, मुंशी, फूलबदन, नेवास, रामरक्षा, सजगू आदि सुरक्षित स्थान की तलाश में हैं।
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