आजमगढ़। सरकार की ओर से अतिरिक्त अनियमित निर्माणों को नियमित करने के लिए शमन योजना-2020 शुरू की गई थी। इस योजना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जबकि जनपद में इस योजना के तहत कुल 15 लोगों ने आवेदन किया था। जिसमें से एक लोगों का आवेदन स्वीक़ृत कर एडीए की ओर से शमन शुल्क का योजना का लाभ दिया गया था। शेष लोगों के आवेदन पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
जनपद में प्राधिकरण का गठन 2008 में हुआ लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ इसे अपनी अवैध कमाई का जरिया बनाए रहे। अगर किसी का निर्माण मानचित्र के विपरीत हो रहा है तो शिकायत के बाद एडीए कर्मचारी मौके पर पहुंचकर कार्य रुकवा देते। बाद में फिर वही निर्माण पूरा हो जाता है। जिसका परिणाम रहा कि बहुत से लोगों ने मानचित्र के विपरीत भवन का निर्माण करा लिया। यदा कदा शिकायत होने पर विभाग के लोग पहुंचते और कुछ लेनदेन के बाद मामला रफा दफा हो जाता। इसी बीच सरकार ने शमन योजना की शुरूआत की तो लोगों को यह आस बंधी कि अपने मानचित्र के विपरीत हुए निर्माण को शमन शुल्क जमा कर दुरुस्त करा सकते हैं। जुलाई से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक कुल 15 लोगों ने आवेदन किया था। जिसमें से एक व्यक्ति के आवेदन का निस्तारण इस योजना के तहत हो चुका है। शेष लोगों का आवेदन अभी निस्तारित नहीं हुआ है। अभी उनका निस्तारण हो उससे पहले ही हाईकोर्ट ने इस योजना पर ही रोक लगा दी। अब इन लोगों के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
शमन शुल्क के इस प्रकार निर्धारित थी दरें
आजमगढ़। इस योजना के तहत जिन लोगों ने मानचित्र के विपरित खाली छोड़ी जाने वाली भूमि पर भी निर्माण करा लिया है तो वह इस योजना का लाभ उठा सकते थे। शमन शुल्क की ओर से शासन द्वारा जो दरें निर्धारित की गई थी। उसके अनुसार आवासीय बहुुमंजिले भवन, भूखंडीय विकास में फ्रंट सेट बैक पार्श्व सेट बैक और पीछे के सेट बैक कवर करने पर भूमि के मूल्य का 50 प्रतिशत शमन शुल्क निर्धारित किया गया था। जबकि व्यावसायिक भवनों में कवर किए गए स्थान के लिए भूमि मूल्य का 100 प्रतिशत और कार्यालय भवन में 75 प्रतिशत शमन शुल्क का निर्धारण किया गया था। जबकि सामुदायिक सुविधाओं पर कब्जा जमाने पर भूमि मूल्य का 25 प्रतिशत शमन शुल्क लिया जा रहा था। शमन शुल्क को जमा करने के लिए लोगों को किश्तों में भी धनराशि जमा करने की छूट दी गई थी। यह योजना 21 जुलाई से शुरू हुई थी जो 20 तक संचालित होनी थी।
शमन योजना के तहत हमारे पास सिर्फ 15 लोगों के आवेदन आए थे। जिसमें एक का निस्तारण हो गया है। शेष लोगों के आवेदन पर अभी विचार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट के रोक लगाने के बाद जिसका शमन योजना में हो गया उसका माना जाएगा। शेष लोगों के आवेदन पर अब विचार नहीं किया जाएगा। - बैजनाथ एडीए सचिव।