आजमगढ़। शिब्ली नेशनल महाविद्यालय के छात्र देश ही नहीं विदेशों में भी उर्दू, अरबी, फारसी में अपना परचम लहरा रहे हैं। समाज सुधार के लिए छात्रों को नैतिक शिक्षा का ज्ञान देना बेहद जरूरी है। उक्त बातें महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के चांसलर प्रो. केडी त्रिपाठी ने कहीं। वह सोमवार को महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उर्दू विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर संगोष्ठी के संयोजक डा. मोहम्मद ताहिर द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन से पूर्व भारत में नैतिक शिक्षा गांधी जी के लिए नायाब पेड़ था। जिसका फल ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाज सेवा था। मौलाना अंसार जुबेरी मुंबई द्वारा समाज सुधार में सहाबियात का चरित्र एवं उसकी वर्तमान समय में सार्थकता पर विचार प्रस्तुत किया गया। मौलाना उमैर सिद्दिकीनदवी ने कहा कि हिंदुस्तान में कानून बनने के बाद भी कन्या भ्रू्ण हत्या जारी है। प्रोफेसर आफताब अहमद अध्यक्ष उर्दू विभाग बीएचयू ने कहा कि शिबली की सरजमीं पर पहुंचना सौभाग्य है।
अध्यक्षता कर रहे हैं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गयास असद खान ने कहा कि देश के विभिन्न भागों से डेलीगेट महाविद्यालय में संगोष्ठी में अपना विचार व्यक्त कर रहे हैं उससे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा के साथ ही लाभ होगा। संचालन करते हुए संयोजक डॉ. मोहम्मद ताहिर ने कहा कि शिब्ली डे के अवसर पर चौथी बार आयोेजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने के लिए विद्वानों के विचार मील का पत्थर साबित होंगे। संगोष्ठी के सह संयोजक महाविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डा.जहूर आलम ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्राचार्य ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी में नुसरत जहां, रिजवान अहमद, डॉ.सलमान अंसारी, डॉ.मसूद अख्तर, डॉ. बाबर, डॉ.अलाउद्दीन, डॉ. एसजेड अली, डॉ. शफकत, डॉ. मोहसिन, डॉ. फहमीदा, मीडिया प्रभारी डॉ.अल्ताफ अहमद, डॉ.आलमगीर, डॉ. बीके सिंह और महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारी, छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।