सगड़ी/लाटघाट। ठंड शुरू होते ही तहसील के प्रसिद्ध ताल सलोना में जहां साइबेरियन पक्षियों का आना शुरू हो गया है। वहीं, बेखौफ शिकारियों ने इन्हें अपना शिकार बनाना भी शुरू कर दिया है। प्रशासन की खामोशी के चलते शिकारियों की खूब चांदी कट रही है। ताल सलोना लगभग 107 हेक्टेयर भूमि में फैला है। यहां बगुला, लालसर, टिकवा और अन्य पक्षियां पहुंच गईं है।
तहसील क्षेत्र के अजमतगढ़ स्थित ताल सलोना में ठंड शुरू होते ही साइबेरियन (विदेशी) पक्षी आकर जाड़े भर अपना बसेरा बना लेते हैं। प्रजनन के बाद फरवरी माह के अंत तक लौट जाते हैं। इस बार भी ठंड शुरू होते ही इनका यहां पहुंचना शुरू हो गया है। विभागीय नजर नहीं पड़ने के कारण शिकारी इसका फायदा उठा रहे हैं। वहीं इस बारे में डीएफओ एसएन मिश्रा का कहना है स्थानीय अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से उन्हें इस बार पक्षियों के नहीं आने की बात कही जा रही थी। यदि ऐसा है तो मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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1500 से 2000 रुपए जोड़ा बिक रहीं विदेशी चिड़िया
सगड़ी/लाटघाट। विदेशी पक्षियों के आने से शिकारियों की भी बल्ले-बल्ले हो गई है। शिकारी इन पक्षियों को मारकर 1500 से 2000 रुपये प्रति जोड़ी के हिसाब से ग्राहकों को बेच रहे हैं। जाल, बंदूक और हल्के जहर से इनका शिकार किया जा रहा है। इनके मांस के लिए लोग जीयनपुर, मुबारकपुर, मोहम्मदाबाद, बिलरियागंज, आजमगढ़, घोसी, मऊ तक के लोग आ रहे हैं।