आजमगढ़। जिले में अधिकारियों की उदासीनता का आलम ये है कि सितंबर माह करीब-करीब बीत चुका है, लेकिन अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की एक भी जांच नहीं हो पाई है। कांट्रैक्ट खत्म होने के कारण पेयजल स्वच्छता मिशन के कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है। पिछले वर्ष भी किट न आने के कारण विभाग की ओर से कोई जांच नहीं की गई थी। इस बार किट आई भी तो अधिकारियों की उदासीनता और वेतन के फेर में धूल फांक रही है। वहीं, मंडलीय और महिला अस्पताल में रोजाना 300 से 350 मरीज दूषित पानी के शिकार पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है या नहीं इसकी जांच के लिए राष्ट्रीय पेजजल स्वच्छता मिशन के नाम से विकास भवन में विभाग है, जो ग्राम्य विकास विभाग के अधीन कार्य करता है। विभाग में जिले के 22 ब्लाकों में कोआर्डिनेटर, तीन जिला सलाहकार और एक कंप्यूटर आपरेटर आउटसोर्सिंग से तैनात है। जिस कंपनी बिग ब्योर के अधीन ये काम करते हैं, उस कंपनी का 31 जुलाई को कांट्रैक्ट खत्म हो गया है। इसके कारण विभागीय जिला सलाहकारों और कर्मचारियों ने काम करना बंद कर दिया है। इसकी नतीजा ये है कि इस वर्ष अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की एक भी जांच नहीं हो सकी है। विभाग के जिला सलाहकार लालचंद यादव ने बताया कि इस बार पानी का जांच के लिए किट आई थी, जो ब्लाकों में पहुंच भी गई है। लेकिन कांट्रैक्ट खत्म होने के कारण पानी की जांच नहीं की जा सकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी की ये हालत है कि मंडलीय अस्पताल में रोजाना पहुंचने वाले 15 सौ मरीजों में 200 से 250 मरीज दूषित पानी की वजह से होने वाले रोगों के शिकार होते हैं। इसी तरह महिला अस्पताल में रोजाना आने वाले मरीजों में 100 से 150 मरीज दूषित पानी की वजह से बीमार होकर पहुंचते हैं। ये मरीजों डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार आदि से पीड़ित होते हैं।
मुद्दा उठाने के बाद ब्लाकों में पहुंची थी किट
आजमगढ़। विभागीय सूत्रों के अनुसार जून माह में ही शासन की ओर से पानी की प्रारंभिक जांच के लिए 80 हजार किट भेजी गई थी। पहले तो कोई तैयार ही नहीं हो रहा था कि इस किट को रखेगा कौन और ब्लाकों तक भिजवाएगा कौन। काफी हुज्जतों के बाद इसे जल निगम के कार्यालय में रखवाया गया। डेढ़ माह बीतने के बाद भी ये किट ब्लाकों को नहीं भिजवाई गई। अमर उजाला की ओर से जुलाई माह में ये मुद्दा उठाने के बाद किट किसी तरह ब्लॉकों में पहुंची तो कांट्रैक्ट खत्म होने के कारण विभाग के कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया और जांच नहीं हुई।
साल में तीन बार होती है जांच
आजमगढ़। पेयजल स्वच्छता मिशन के जिला सलाहकार लालचंद यादव ने बताया कि विभाग की ओर से वर्ष में तीन बार पानी की जांच करनी होती है। एक बार बरसात से पहले, दूसरी बार बरसात के बाद जांच होती है। इसके अलावा एक बार जब गर्मी अपने चरम पर होती है तो भी जांच का प्रावधान है। इस वर्ष इसमें से एक भी जांच नहीं हुई है।
पिछले वर्ष भी नहीं हुई थी जांच
आजमगढ़। विभाग की माने तो पिछले वर्ष भी शासन की ओर से जांच की किट नहीं आने के कारण पानी के एक भी जांच नहीं की जा सकी थी। विंग्स संस्था की ओर सभी ब्लाकों के पानी जांच जरूर की गई थी। इसमें अतरौलिया, मार्टीनगंज और अहरौला में पानी में फ्लोराइज की मात्रा अधिक मिली थी। 2015 में विभाग की ओर से की गई जांच में तीन ब्लाकों में हार्डनेस, आयरन और नाइट्रेट की मात्रा अधिक मिली थी। इससे शरीर में पथरी, हड्डियां टेढ़ी होने की समस्या होती है।
योजनाओं को लग रहा पलीता
आजमगढ़। विभाग की ओर से सितंबर माह में स्वच्छता से संकल्प सिद्धि योजना के तहत स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर पोस्टर और बैनर के माध्यम से दूषित जल के प्रति लोगों को जागरूक करना था। इसके अलावा एक से 15 अक्तूबर तक जल पखवाड़े के तहत ग्रामीणों के दूषित पेयजल से होने वाले नुकसान के बारे में बताना है। साथ ही पानी को कैसे शुद्ध किया जाए ये भी बताया है, लेकिन ये योजनाएं भी कांट्रैक्ट की भेट चढ़ती दिख रही हैं।
डायरिया से हो चुकी हैं मौतें
आजमगढ़। जहानागंज ब्लाक के गांव खालसा और करउत में डायरिया के प्रकोप के कारण कुल सात लोगों की मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पानी के सैंपल भी लिए गए थे और दवाओं का छिड़काव बी कराया गया था। जांच में पानी दूषित मिला था।