आजमगढ़। जनपद में ओडीएफ की प्रगति काफी धीमी है। निकाय तो दूर नगर क्षेत्र तक ओडीएफ नहीं हो सके हैं।13 निकायों में लगभग सौ वार्डों के ओडीएफ होने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन इसकी सूची का गजट कराने को तैयार नहीं है। इसी कारण नगरीय निकाय के प्रभारी अधिकारी इसे ओडीएफ मानने को तैयार नहीं हैं। इतना ही नहीं अधिकारियों ने जिन 82 गांवों को गोद लेकर कुपोषण से मुक्त करने का संकल्प लिया था, उसे भी ओडीएफ नहीं किया जा सका है।
दो अक्टूबर 2018 तक ओडीएफ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब करीब छह महीने बचे हैं लेकिन अब तक जनपद में मात्र 86 गांवों ही ओडीएफ हो सके हैं। जनपद में कुल 13 नगर निकाय और 172 वार्ड हैं। इसमें दो पालिका और 11 नगर पंचायतें हैं। आजमगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में कुल 25 वार्ड हैं। आजमगढ़ नगरपालिका क्षेत्र का अभी तक कोई भी वार्ड ऐसा नहीं है जिसे पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित किया जा सके। हालांकि नगरपालिका की ओर से इधर तेजी से कार्य कराए गए हैं। इसके चलते 15 वार्ड ऐसे हैं जिनमें दो से तीन शौचालय बनते ही उसे ओडीएफ घोषित किया जा सकता है। 13 निकायों की ओर से 172 वार्डों में सौ के ओडीएफ होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसकी सूची के प्रकाशन के लिए कोई तैयार नहीं है।
ग्रामीण इलाकों की बात करें तो कुल 3928 गांवों को ओडीएफ कराना है। जिसके सापेक्ष जिला पंचायत राज कार्यालय की ओर से अब तक मात्र 86 गांवों ही ओडीएफ हैं। कुपोषण से मुक्ति के लिए जिले के अधिकारियों द्वारा 82 गांवों को गोद लिया गया था। इन गांवों के भी ओडीएफ न होने के कारण गांव को कुपोषण से मुक्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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पूर्व में ओडीएफ को लेकर नगर क्षेत्र में ज्यादा कार्य नहीं हुए जिसके कारण थोड़ी परेशानी आ रही है। लेकिन अब इसमें तेजी से कार्य किया जा रहा है। नगर क्षेत्र के 15 वार्ड ऐसे हैं जिनमें कुछ शौचालय बनने शेष हैं इसके बाद इन्हें ओडीएफ घोषित कर दिया जाएगा।
प्रशांत कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका।
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अभी तक जिले के 86 गांव ही ओडीएफ हुए हैं। काफी धीमा काम हुआ है। लेकिन अब मैं इसमें तेजी लाने के लिए अलग से योजना बना रहा हूं। 10 से 15 दिनों में इसमें तेजी दिखने लगेगी।
आनंद प्रकाश, जिला पंचायत राज अधिकारी।