आजमगढ़। स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से नगर के जिला अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक परिसर में शुक्रवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान 25 लोगों ने रक्तदान शिविर में भाग लेकर महादानी बनने का गौरव हासिल किया। सबने अमर उजाला के प्रयास की सराहना की।
अक्सर दुर्घटनाओं या आपरेशन के दौरान रक्त की कमी के कारण प्रतिदिन हजारों लोग अपने बहुमूल्य जीवन का त्याग कर देते हैं। अपने पीछे वह भरा-पूूरा परिवार रोने बिलखने के लिए छोड़ जाते हैं। ऐसे अमर उजाला फाउंडेशन का यह प्रयास है कि रक्त की कमी की वजह से किसी की कोई जान न जाने पाए। इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कारगिल विजय दिवस के अवसर और स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में शुक्रवार को ब्लड बैंक परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में भाग लेने के लिए सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीएल केशरवानी ने फीता काटकर शिविर का शुभारंभ किया। इसके बाद शुरू हुआ रक्तदान का सिलसिला जो दोपहर बाद दो बजे तक चलता रहा। जब यह रूका तो 25 लोग रक्तदान कर चुके थे। शिविर की सबसे बड़ी खास बात महिलाओं की भागीदारी रही। क्योंकि महिलाएं रक्तदान को लेकर बहुत भ्रमित रहती है। उन्हें कमजोरी होने का भय सताता रहता है। लेकिन जिस तरह से अमर उजाला के आयोजनों में महिलाएं पहुंच रही हैं उसे देखकर ऐसा लगा कि अब महिलाओं में भी इसके प्रति जागरूकता फैल रही है। ब्लड बैंक के प्रभारी डा. अजहर सिद्दीकी ने रक्तदान करने वालों में प्रमाण पत्र का वितरण किया।
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बोले महादानी-
संतलाल विश्वकर्मा ने कहा कि रक्तदान करके बहुत अच्छा लगा। पहले तो मन में एक झिझक थी लेकिन रक्तदान करने के बाद वह झिझक दूर हो गई। अब उन्हें जब भी मौका मिलेगा वह रक्तदान करने से नहीं चूकेंगे।
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पति जावेद के साथ रक्तदान करने पहुंची महिला शबाना ने कहा कि उनके पति ने उन्हें रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। मन में रक्तदान को लेकर बहुत भ्रांतियां थी जो अब दूर हो चुकी हैं। क्योंकि रक्तदान करने के बाद मुझे किसी प्रकार की कमजोरी का कोई एहसास नहीं हो रहा है।
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वरूण सिंह ने कहा कि उन्होंने पहली बार रक्तदान किया है। रक्तदान करने से पहले मन में एक डर था लेकिन अब वह डर दूर हो गया है। उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके इस एक यूनिट रक्त से कई लोगों की जिंदगी बच सकती है।
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डा. विक्रमा यादव ने कहा कि उन्होंने कई बार रक्तदान किया है। लेकिन अमर उजाला के इस रक्तदान शिविर में आकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने अमर उजाला के प्रयास के सराहना की और कहा कि जब भी शिविर का आयोजन होगा वह रक्तदान करने से पीछे नहीं हटेंगे। क्योंकि इससे बड़ा पुनीत कार्य दूसरा नहीं है।
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प्रयाग राज सिंह ने कहा कि हमने कई बार रक्तदान किया है। जब भी कोई हमसे कहता है हम उसके लिए रक्तदान कर देते हैं। क्योंकि इससे बड़ा पुनीत कार्य कोई नहीं है। एक यूनिट रक्त देने से हमें कोई नुकसान नहीं होता है ओर किसी की अनमोल जान बच जाती है। हमारी तो सबसे अपील है कि जब भी मौका मिले रक्तदान जरूर करें।
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यह बने महादानी
आजमगढ़। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में 25 लोगों ने रक्तदान कर महादानी बनने का गौरव हासिल किया। जिसमें डा. विक्रम यादव, जावेद आलम, मोहम्मद नायब, हेमंत पांडेय, आशुतोष मिश्रा, आशीष मद्घेशिया, संतलाल, वरूण सिंह, प्रयाग राज सिंह, संतलाल विश्वकर्मा, शबाना बानो, विकास सिंह, सतीश चंद्र, हिमालय सिंह, बीनू, विनोद कुमार, अजय, अभिषेक प्रियदर्शी, पार्वती देवी, रीना देवी, लुकमान, सोनू, राजन गोड़, बबिता और संजय कुमार शामिल हैं।
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पति के प्रोत्साहन पर किया रक्तदान
आजमगढ़। रक्तदान में कोट किला मुहल्ले के रहने वाले जावेद अपनी पत्नी शबाना के साथ पहुंचे। उन्होंने अपनी के साथ रक्तदान करने की इच्छा जाहिर की और रक्तदान भी किया। जावेद ने कहा कि मैं तो अक्सर बाहर रहता हूं लेकिन जब भी जनपद में रहता हूं ऐसे शिविरों में पहुंचकर रक्तदान करता हूं। आज मेरे प्रोत्साहन पर मेरी पत्नी ने पहली बार रक्तदान किया। मैं समाज में लिए कुछ करने की हसरत के साथ इस कार्य को करता हूं। मुझे इससे किसी की जान बचाने की खुशी मिलती है।
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प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीएल केशरवानी ने अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अमर उजाला और सामाजिक संगठनों की ही देन है कि जनपद के लोगों में अन्य जनपदों की अपेक्षा रक्तदान के प्रति ज्यादा जागरूकता है। अमर उजाला द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान से महिलाओं में भी जागरूकता आई है। जो समाज के लिए अच्छी खबर है। हम अमर उजाला परिवार को इसके लिए धन्यवाद देते हैं।