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21 अधिकारियों पर पौने 13 लाख का लगा जुर्माना

Tue, 03 Apr 2018 11:18 PM IST
आजमगढ़ ब्यूरो
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भारतीय करंसी
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 वर्ष 2008 से 2013 के बीच अधिकारियों द्वारा जनता द्वारा जनसूचना के तहत मांगी गई सूचना को देने में हीलाहवाली की गई। इस पर सूचना मांगने वाले व्यक्तियों ने इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग से कर दी। जिसका परिणाम हुआ कि रजिस्ट्रार राज्य सूचना आयोग ने सूचना न देने पर जिले के 21 अधिकारियों पर 12 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जनता को यह अधिकार मिला कि वह अधिकारियों से किसी भी विभाग की सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन अधिकारियों द्वारा जनता के इस हथियार को भी दबाने की कोशिश की गई। उनके द्वारा मांगी गई सूचनाओं को देने में अधिकारियों ने आनाकानी की।


फरियादी ने जब इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग से की तो आयोग की भौहें ऐसे अधिकारियों पर टेढ़ी हो गई जिन्होंने परिवादियों को सूचना देने में आनाकानी थी और उसने सभी प्रति सूचना 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया है। जिले में जिन 21 अधिकारियों पर जुर्माना लगा है उनमें तीन मंडल स्तरीय अधिकारी भी शामिल हैं।
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इनमें डायट प्राचार्य और संयुक्त शिक्षा निदेशक पर तीन-तीन मामलों में 75-75 हजार रुपये, जिला विद्यालय निरीक्षक पर आठ मामलों में दो लाख रुपये, लेखाधिकारी माध्यमिक, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक, मनोरंजन कर अधिकारी, एसडीएम सदर, सहायक निबंधक/रजिस्ट्रार चिटफंड सोसायटी, प्रबंधक गांधी आश्रम अतरौलिया, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी, तहसीलदार बूढ़नपुर और लालगंज पर एक-एक मामलों में 25-25 हजार रुपये, जिला पंचायत राज अधिकारी पर 10 मामलों में ढ़ाई लाख रुपये, मुख्य विकास अधिकारी पर चार मामलों में एक लाख, एडी बेसिक, सीएमओ और सेतु निगम पर दो-दो मामलों में 50-50 हजार रुपये, जिला कार्यक्रम अधिकारी और बीएसए पर तीन-तीन मामलों में 75-75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

सबसे ज्यादा मामले डीपीआरओ और डीआईओएस से संबंधित
आजमगढ़। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा 10 मामलों में जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा परिवादियों को सूचना नहीं दी गई। दूसरे नंबर पर जिला विद्यालय निरीक्षक हैं। जिनके स्तर से आठ मामलों में परिवादियों को सूचना नहीं उपलब्ध कराई गई। मनोरंजन कर अधिकारी ने शायद सेवानिवृत्त होने के कारण देयकों का भुगतान रुकने के डर से जुर्माने की राशि अदा कर दी है।
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