संदीप सौरभ सिंह
आजमगढ़। प्रत्येक वर्ष महिलाओं के गर्भ से ही हजारों बच्चे ‘गायब’ हो रहे हैं। ऐसा हम नहीं स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट कह रही है। वर्ष 2016-17 में 44180 और 2017-18 में 70800 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भवती तो थीं, लेकिन इनके बच्चों का क्या हुआ स्वाथ्य विभाग के पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। सभी पंजीकृत महिलाओं के बारे में जानकारी न होना जनपद में गर्भपात के खेल की तरफ इशारा कर रहा है।
शासन की ओर से आशाओं के माध्यम से प्रत्येक वर्ष गर्भवतियों का पंजीकरण कराया जाता है। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष जन्म लेने वाले बच्चों का आकंड़ा भी दर्ज कर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की इसी रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में बच्चे ‘गायब’ हो रहे हैं। वर्ष 2016-17 में स्वाथ्य विभाग की ओर से कुल 128700 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इसमें सरकारी अस्पतालों में 48750 बच्चों का जन्म हुआ। इसके अलावा 27292 बच्चों का जन्म प्राइवेट अस्पतालों में हुआ है। 8474 बच्चों का जन्म घर पर दर्शाया गया है। 44184 गर्भवती महिलाएं ऐसी है, जिनके बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं वर्ष 2017-18 में कुल 130210 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इसमें सरकारी अस्पतालों में 503257 बच्चों का जन्म हुआ। इसके अलावा 3202 बच्चों का जन्म प्राइवेट अस्पतालों में हुआ है। 5883 बच्चों का जन्म घर पर दर्शाया गया है। 70800 गर्भवती महिलाओं के बच्चों का पता ही नहीं चला। अब सवाल उठता है कि 2016-17, 2017-18 में 114984 गर्भवती महिलाओं के बच्चे गर्भ से ही गायब हो गए। मां के गर्भ में पल रहे इन बच्चों के साथ क्या हुआ इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं है।
आशाएं और एनएम जुटाती हैं आंकड़ा
गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, टीकाकरण और प्रसव आदि की पूरी जिम्मेदारी जनपद की आशाओं और एएनएम के पास होती है। जनपद में एएनएम के 525 पदों में 470 की तैनाती हैं। 4270 आशाओं के पद के सापेक्ष लगभग 3500 आशाएं काम कर रही हैं। सारा आंकड़ा उन्हीं की ओर से एकत्र किया जाता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो एएनएम और आशाओं की ओर से ठीक से निगरानी नहीं करने के कारण आंकड़ों में अंतर आ जाता है।
गर्भपात के खेल की ओर हो रहा इशारा
दो साल में 1114984 गर्भवती महिलाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं होना जनपद में गर्भपात के खेल की ओर भी इशारा करता है। जनपद में कई स्थानों पर लिंग जांच और भ्रूणहत्या का खेल जारी है।
जनपद में आशाओं और एएनएम के पद खाली होने से ठीक तरीके से ट्रैकिंग नहीं हो पा रही हैं। इसलिए आंकड़ों में इतना अंतर आ रहा है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। -सतीश यादव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएचएम