आजमगढ़। नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को देवी भक्तों ने माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। देवी के जयकारों से मंदिर गुंजायमान रहे। भक्तों ने मां की पूजा अर्चना कर परिवार के सुख-समृद्घि की कामना की।
मंगलवार को नवरात्र के तीसरे दिन देवी मंदिरों में सुबह से ही माता के भक्तों की कतार लगी थी। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे जयकारों से मंदिर परिसर गूंज रहा था। भक्तों ने माता को नारियल, चुनरी, कपूर, धूप, अगरबत्ती चढ़ाया। भक्तों ने मां की पूजा अर्चना कर परिवार के सुख समृद्घि की कामना थी। बुधवार को भक्तों द्वारा मां के चौथे स्वरूप माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाएगी। अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्मांडा देवी के नाम से नवाजा गया है। इनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें सात हाथों में कमंडल, धनुष बाण, कमल, पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा है जबकि आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। माता के इस रूप की उपासना करने से भक्तों के सारे शोक मिट जाते हैं। उनके आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्घि होती है। माता थोड़ी सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं। यदि मनुष्य सच्चे हृदय से इनकी शरण में आता है तो उसे परम पद की प्राप्ति होती है। इनकी उपासना मनुष्य को आधियों-व्याधियों से सर्वथा विमुक्त करके उसे सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाने वाली है। अत: अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिए।