ठेकमा। स्थानीय ब्लाक क्षेत्र के इरनी गांव में स्थायी गौशाला का निर्माण चल रहा है। यहां 139 मवेशी है, जिन्हें वर्तमान में पंचायत भवन में रखा गया है। इनकी देखभाल के लिए खंड विकास अधिकारी ने 12 सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगा दी है। जो इन मवेशियों की पूरी देख-देख करेंगे और समय -समय पर चारा आदि देते रहेंगे।
अभी कुछ दिनों पूर्व ही मुख्यमंत्री ने पशु आश्रय स्थलों में मवेशियों के मौत होने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की थी और कई अधिकारियों पर सीएम ने कार्रवाई का भी निर्देश दिया था। मवेशियों की मौत होने पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के सीएम के फरमान के बाद जिले के जिम्मेदार अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इरनी गांव में निर्माणाधीन स्थाई गौशाला की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी की है। यहां 139 मवेशी है, जिन्हें वर्तमान में पंचायत भवन में रखा गया है। इनकी देखरेख के लिए ओढ़नी गांव के सफाई कर्मियों व ग्राम प ंचायत अधिकारी की ड्यूटी लगा दी गई है। उक्त दर्जन भर सफाई कर्मी आठ-आठ घंटे क शिफ्ट में पशुओं की देखरेेख करेंगे। ये सफाई कर्मी ही मवेशियों को चारा खिलाएंगे और भ्रमण कराएंगे। इसके साथ ही सात ग्राम विकास अधिकारी भी ड्यूटी पर लगाये गये है।
लाटघाट। पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत के बाद मुख्यमंत्री की सख्ती व कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। मंडलायुक्त के निर्देश पर पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक आलोक कुमार वर्मा ने बुधवार को अस्थाई पशु संरक्षण गृह पारनकुंडा पहुंच कर औचक निरीक्षण किये।
औचक निरीक्षण के दौरान पशु संरक्षण गृह की व्यवस्था की जांच पड़ताल की गई। इसके साथ ही वहां मौजूद मवेशियों की गणना भी करायी गई। जिसमें बुधवार को वहां 71 मवेशी मिले। जिसमें दो बीमार है। वहीं 15 जुलाई को एक मवेशी के मौत की भी उन्हें जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि मंडलायुक्त के निर्देश पर वे निरीक्षण के लिए आये है और अपनी रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपेंगे। निरीक्षण के दौरान अस्थाई पशु संरक्षण गृह पर टिन शेड की व्यवस्था दुरूस्त नहीं मिली। आधे से ज्यादा मवेशी अभी भी खुले आसमान के नीचे रह रहे है। प्रधान शिवचंद पटेल ने बताया कि एक मवेशी की मौत हुई है जो बीमार था। अभी भी दो मवेशी बीमार है, जिनका इलाज पशु डॉक्टर दुर्गा प्रसाद मौर्य कर रहे है।