आजमगढ़। केंद्र और प्रदेश सरकार ने दो अक्तूबर 2018 तक देश को ओडीएफ कराने का सपना संजोया है। पानी की तरह योजना पर पैसा बहाया जा रहा है। इसके बाद भी जनपद की स्थिति स्वच्छ भारत मिशन योजना में सुधरने का नाम नहीं ले रही है। सुधरे भी कैसे जनपद में योजना के तहत ग्रामीणों को मोटीवेट करने के लिए लगभग 1700 स्वच्छाग्रहियों की तैनाती की गई थी। इन्हें 230 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने का प्रावधान है, लेकिन भुगतान न होने 90 फीसदी स्वच्छग्रही निष्क्रिय पड़े थे। पिछले साल का भुगतान अब किया जा रहा है। सभी ब्वाकों में पांच मांह पहले वार रूम बनने थे। अभी तक ठीक से संचालित नहीं हुए है। ये सभी खुलासे यूनीसेफ की जांच में हुए हैं। आईईसी के तहत जनपद में अभी कोई कार्य नहीं हुआ है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से एसबीएम ग्रामीण में जनपद फिसड्डी साबित हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन में जनपद की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सूबे में जनपद सबसे निचले स्थान पर तो है ही मंडल में भी सबसे निचले स्थान की शोभा बढ़ा रहा है। ऐसा संभव हुआ है विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से। जनपद में एक अप्रैल 2018 को शौचालय निर्माण का क्रमिक लक्ष्य 371518 था। इसके सापेक्ष अभी तक 200540 शौचालयों के लिए धनराशि खातों में भेजी गई है। वहीं, 2014 से अब तक जनपद में 80 हजार से भी कम शौचलाय तौयार हो पाए हैं। नतीजा ये है कि जनपद सूबे में 75वें स्थान पर है। इससे ऊपर 70वें स्थान पर बलिया और 68वें स्थान पर मऊ है। हालांकि इनकी भी स्थिति कहीं से अच्छी कहने लायक नहीं है फिर भी आजमगढ़ से ऊपर हैं। ओडीएफ में जनपद में 3928 राजस्व ग्रामों के सापेक्ष अभी तक 605 गांवों को ही ओडीएफ कराया जा सका है। 15.40 फीसदी आच्छादन के साथ यहां भी जिला 73वें स्थान पर है। बलिया 72वें और मऊ 62वें स्थान पर है। जनपद की ये स्थिति हो भी क्यों नहीं। पूछने पर अधिकारियों की ओर से ये कह दिया जाता है कि ग्रामीण शौचालय बनवाने और खुले में शौच मुक्ति के लिए मोटीवेट ही नहीं हो रहा है। वहीं, ग्रामीणों को विभिन्न माध्यमों से मोटीवेट करने के लिए आया छह करोड़ सालों से दबा कर रखा गया। ग्रामीणों को मोटीवेट करने के लिए 1700 से ज्यादा स्वच्छाग्रही रखे गए हैं। इनका कार्य गांवों में जाकर लोगों के शौचालय निर्माण और खुले में शौच मुक्ति के लिए मोटीवेट करना है। इसी कार्य के लिए उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से 230 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा शौचालय बनवाने और ओडीएफ कराने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। लगभग सभी स्वच्छाग्रही भुगतान न होने से इस समय निष्क्रिय पड़े हैं। इसका खुलासा यूनीसेफ टीम की जांच में हुआ है। एक साल पहले का भुगतान अब किया जा रहा है। इसके अलावा सभी ब्लाकों में पांच माह पहले ही वार रूम की स्थापना के निर्देश दिए गए हैं। यूनीसेफ की जांच अधिकतर वार रूम का संचालन ठीक से होना नहीं पाया गया है। एसबीएम में आईईसी के तहत सालों से छह करोड़ की धनराशि पड़ी है। इशके बाद भी जांच में खुलासा हुआ है कि जनपद में अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से एसबीएम ग्रामीण में जनपद फिसड्डी साबित हो रहा है।
अभी तक जितने भी ब्लाकों की जांच की गई है, कहीं वार रूम ठीक से संचालित होता नहीं दिखा है। आईईसी के तहत एक भी कार्य नहीं हुआ है। लगभग सभी स्वच्छाग्रही निष्क्रिय हैं। इसके बारे में जिलाधिकारी को जानकारी दे दी गई है।
भाष्कर पराशर, जिला समन्वयक यूनीसेफ
सभी ब्लाकों को बीडीओ को वार रूम को दुरुस्त कराने सऔर उसके सही संचालन के निर्देश दिए गए हैं। कई पर कार्रवाई भी हुई है। स्वच्छाग्रहियों का भुगतान करा दिया गया है। आईईसी के तहत भी कार्य शुरू करा दिया गया है। आगे जो भी लापरवाही बरतेगा उस पर कार्रवाई तय है।
शिवाकांत द्विवेदी, जिलाधिकारी