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समतामूलक समाज की स्थापना करना पंथ का उद्देश्य

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बिंद्राबाजार। मुहम्मदपुर विकास खंड के मोहद्दीनपुर गांव में शिवनारायण पंथ का सोमवार को चौथा दो दिवसीय पंचवर्षीय जिला संत सम्मेलन संपन्न हुआ। जिसमें अनुयायिकों को पंथ के उद्देश्यों के बारे बताया गया।
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मुख्य अतिथि आचार्य बाबा सरजू दास ने कहा कि संत की कोई जाति नहीं होती है, संत तो समाज में लोगों को दिशा देने का कार्य करता है। हमारे देश में 900 से ज्यादा पंथ हैं आज पंथों को भी जाति धर्म के नाम पर बांटने की साजिश की जा रही है जो ठीक नहीं है। शिवनारायण पंथ के उप विश्व महंथ स्वामी कपिल देव केसरी महाराज ने कहा कि स्वामी शिवनारायण मत पंथ निर्गुण संप्रदाय है, जो मूर्ति पूजा का विरोध करता है। इस पंथ का मुख्य उद्देश्य वर्ग विहीन, जातिविहीन और समतामूलक समाज की स्थापना करना है। राम रहीम, रामकृपाल, आसाराम बापू जैसे कई ऐसे बाबाओं ने अपने कुकृत्य से संत समाज को कलंकित किया है। ऐसे कृत्य से बाबाओं को बचने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि बाबा श्यामसुंदर दास ने कहा कि गुरु व्यक्ति को समाज में अच्छा इंसान बनने का संदेश देता है ताकि एक स्वच्छ समाज की कल्पना की जा सके। इस मौके पर बाबा भोला दास पुजारी, राजाराम दास, बाबा मुंशीलाल, बाबा बालक दास, बाबा तुलसी दास, बाबा विजय त्यागी, राजनाथ महंथ आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता जिला हुकुमी महंथ शंकर प्रसाद और संचालन चंद्रबली महंथ और तिलकधारी ने किया।
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