आजमगढ़। मंडलीय अस्पताल और महिला अस्पताल में जा रहे हैं तो अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें। आपके किसी सामान की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की नहीं है। पिछले दिनों महिला अस्पताल की सीएमएस की ओर से ये बयान दिया जा चुका है। दोनों अस्पतालों में दिन और रात पुलिस पिकेट तैनात करने की बात हुई थी, लेकिन कुछ दिन बाद पुलिस नदारद हो गई। जिला अस्पताल में मौजूद छह गेट दिन और रात दोनों में खुले रहते हैं। इसकी वजह से मरीजों का अक्सर सामान आदि चोरी होते रहता है। महिला अस्पताल में लगा सीसीटीवी कैमरा काफी दिनों से बंद चल रहा है। इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि गत दिनों आवारा कुत्ता महिला अस्पताल से नवजात का शव उठा ले गया था।
अस्पताल गेट पर खुली थी चौकी
जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गौर करें तो अस्पताल परिसर के गेट पर ही पुलिस चौकी खोली गई थी। जिसमें एक दरोगा और तीन सिपाही पहले दिन और रात तैनात रहते थे। वर्ष 2007 में इस पुलिस चौकी को बंद कर दिया गया। अस्पताल से सिपाहियों को हट जाने का परिणाम रहा कि वर्ष 2012 में मरीज के घरवालों और डाक्टरों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। तभी से दो होमगार्ड यहां तैनात कर दिए गए, जो हमेशा एसआईसी के साथ रहते हैं।
खुले रहते हैं अस्पताल के गेट
जिला अस्पताल में कुल छह गेट है। जो हमेशा खुले रहते हैं। गेट खुला होने की वजह से रात के समय मरीज और उनके घर वालों के सामान अक्सर चोरी होते रहता है। अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टि से छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन इनकी उपयोगिता न के बराबर है। अस्पताल में पुलिसवालों के न होने से आए दिन जहां लोगों की बाइक चोरी हो रही हैं, वहीं डाक्टर और कर्मचारियों के बीच नोंकझोंक होेती रहती है।
खराब पड़े महिला अस्पताल के कैमरे
जिला महिला अस्पताल के सुरक्षा की बात करें तो यहां सुरक्षा गार्ड के नाम पर एक प्राइवेट गार्ड रखा गया है। लेकिन उसके आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं रहता। अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टि से पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन वर्तमान समय में कोई भी नहीं चलता। अधिकारियों की तरफ से यहां दो होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। जो सुबह दस बजे के बाद आते हैं और कुछ देर तक रहने के बाद चले जाते हैं। जिला महिला अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा न होने की वजह से यहां अक्सर हंगामा और तोड़फोड़ होती रहती है।
कुत्ता उठा ले गया था नवजात का शव
लापरवाही का परिणाम है कि करीब पंद्रह दिन पूर्व अस्पताल के भीतर से आवारा कुत्ता नवजात के शव को उठा ले गया। डाक्टर और कर्मचारी सहित अन्य को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। इसके अलावा इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कई बार मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं यहां आम हो गई हैं। डाक्टर और कर्मचारियों की मांग पर दोनों अस्पताल के बाहर पुलिस की पिकेट लगाई गई थी, लेकिन कुछ दिन के बाद पिकेट भी हटा ली गई।
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कोट
अस्पताल में सुरक्षा के लिए दो होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन उनके आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। अस्पताल में लगा सीसीटीवी कैमरा खराब पड़ा है। उसे दुरुस्त कराने के लिए कंपनी को पत्र भेजा गया है।
- डा. अमिता अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस पिकेट लगाने के लिए पत्र भेजा गया है। रात के समय छह गेटों में से पांच को बंद कर दिया जाता है। जो अपने सामान की रक्षा नहीं करेगा। वह चोरी हो ही जाएगा।
- डा. जीएल केसरवानी, एसआईसी, जिला अस्पताल