आजमगढ़। समाज कल्याण अधिकारी ने पिछले दिनों छह-सात विद्यालयों का स्थलीय सत्यापन किया। इस दौरान किसी विद्यालय में बच्चे नहीं मिले तो किसी में न्यूनतम उपस्थिति मिली। शिक्षा का स्तर भी काफी खराब मिला। मौके की स्थिति देख समाज कल्याण अधिकारी दंग रह गए। सभी को सुधार करने के निर्देश देने के साथ ही कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। समाज कल्याण विभाग से जनपद में लगभग 83 अनुसूचित प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें आठ सौ के आसपास शिक्षक भी हैं, जिन्हें सरकार की ओर से वेतन जारी किया जाता है। इन विद्यालयों की हालवत की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। पिछले दिनों समाज कल्याण अधिकारी राजेश यादव ने कुछ विद्यालयों का निरीक्षण किया तो इसकी पोल खुल कर सामने आ गई। समाज कल्याण अधिकारी राजेश यादव ने अनुसूचित प्राथमिक विद्यालयगहन जगदीशपुर, विधावनपुर, मोहनाठ, मुड़ियार और वजीरमलपुर आदि विद्यालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ विद्यालयों में तो बच्चों की उपस्थिति ही शून्य मिली। कुछ में एकदम न्यूनतम मिली। किसी भी विद्यालय में 25 से 30 फीसदी से उपस्थिति ज्यादा नहीं थी। बच्चों से प्रधानमंत्री का नाम पूछा गया था तो उन्होंने महात्मा गांधी का नाम लिया। इसी तरह से कई और गलत उत्तर बच्चों की ओर से बताए गए। अध्यापकों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं था। उन्होंने सभी अध्यापकों को सुधार करने के निर्देश देने के साथ ही कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अध्यापक रो रहे सुविधाओं का रोना
आजमगढ़। एक तरफ समाज कल्याण अधिकारी अनुसूचित प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की कमी और शिक्षा का स्तप खराब होने को लेकर अध्यापकों को दोष दे रहे हैं। वहीं, अध्यापक सुविधाओं का रोना रो रहे हैं उनका कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील, ड्रेस, जूता, बैग, किताबों आदि की सुविधाओं दी जाती हैं। अनुसूचित प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को इसकी सुविधा नहीं हैं। इसलिए बच्चे इसके प्रति आकर्षित नहीं होते। कुल मिलाकर अब अनुसूचित प्राथमिक विद्यालयों की उपयोगिता पर ही सवाल उठने लगे हैं।