आजमगढ़। नोटबंदी के डेढ़ साल बाद एक बार फिर कैश की किल्लत बैंकों पर हो गई है। जिसके चलते उपभोक्ताओं को जरूरत भर नकदी नहीं मिल पा रही है। शादी-विवाह के इस मौसम में कैश की किल्लत के चलते लोग परेशान है। शहर से लेकर ग्रामीणांचल के उपभोक्ता कैश के लिए यहां से वहां दौड़ रहे है।
मोदी सरकार ने लगभग डेढ़ वर्ष 1000 और 500 के नोट बंद किया था। इसके पश्चात नये नोट का परिचलन शुरू होने तक ग्राहकों को कैश की काफी किल्लत झेलनी पड़ी थी। एटीएम और बैंको पर पुरानी नोट जमा करने और कैश भुगतान को लेकर कई माह तक लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा था। इधर कुछ दिनों से बैंकों पर पुन: कैश की किल्लत देखने को मिल रही है। जिसके चलते लगभग 30 से 35 प्रतिशत एटीएम जहां कई दिनों से बंद पड़े हुए है तो वहीं अन्य एटीएम पर भी रेगुलर पैसा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। बैंक से भी एक मुश्त धनराशि की नकदी देने में कोताही बरती जा रही हे। शादी-विवाह का मौसम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में लोगों को नकदी की ज्यादा जरूरत है और बैंकों से कैश न मिलने से लोग परेशान हाल है। जिस भी एटीएम पर कैश उपलब्ध हो रहा है वहां लाइन लगनी पुन: शुरू हो गई है। बूढनपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के स्थित बैंक एक बार फिर नकदी का भुगतान ना के बराबर कर रहे है। ज्यादातर बैंको द्वारा ग्राहकों से कैश न होने की बात कही जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रो में स्थित एटीएम की स्थिति तो यह है कि शायद ही कोई एटीएम चल रहा हो। बूढनपुर तहसील क्षेत्र में विभिन्न बैंकों के लगभग 16 एटीएम ऐसे है जहां कई दिनों से पैसा नहीं निकला है। कैश की व्यवस्था को लेकर लोग इधर से उधर भटकने को मजबूर हो गए है। किसी भी बैंक के अधिकारी करेंसी की कमी की बात को स्वीकार नहीं कर रहे है, लेकिन इसके बाद भी किसी न किसी कारण से ग्राहकों को नकदी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। स्पष्ट कारण किसी भी बैंक के अधिकारी बताने से कतरा रहे है।
आरबीआई से कैश उपलब्ध नहीं हो रहा है। जिसके चलते ही बैंकों पर कैश की कमी है। यही कारण है कि न तो बैंक से कैश का भुगतान हो पा रहा है न ही हम एटीएम मशीनों का ठीक ढंग से संचालन कर पा रहे है। आजमगढ़ को कैश उपलब्ध कराने में आरबीआई ज्यादा हीलाहवाली कर रहा है।
मनोज कुमार, एलडीएम, यूबीआई, आजमगढ़।