आजमगढ़। रोडवेज क्षेत्र में शुक्रवार की रोडवेज कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच हुई मारपीट के मामले में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से रोडवेज यूनियन के दबाव में काम कर रही है। जिसके चलते पुलिस का एक पक्षीय कार्रवाई का क्रम जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता एसके सत्येन के गिरफ्तार भाई को जहां जेल भेज दिया गया वहीं मुकदमें में धारा भी बढ़ा दी गई जबकि सत्येन पक्ष की तहरीर पर अब तक पुलिस ने कार्रवाई तो दूर मुकदमा ही दर्ज नहीं किया है।
शनिवार को प्रेशर हार्न बजाने को लेकर रोडवेज तिराहे पर स्थानीय व्यक्ति और रोडवेज कर्मी के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान दोनों पक्षो में मारपीट भी हुई थी। मारपीट की इस घटना के बाद रोडवेज कर्मचारी दबाव बनाने के लिए सड़क पर बसो को आड़ा-तिरछा खड़ा कर जाम लगा दिया था। इसके साथ ही रोडवेज कर्मचारी कमलेश सिंह की तहरीर पर पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता एसके सत्येन, उनके भाई नितिन समेत पांच-छह अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। इतना ही नहीं सत्येन के बड़े भाई विजय को पुलिस ने सुबह ही हिरासत में भी ले लिया। रोडवेज कर्मचारियों का दबाव बढने पर दोपहर में एसके सत्येन की भी गिरफ्तारी हो गई, जिन्हें देर शाम छोड़ दिया गया। वहीं एसके सत्येन पक्ष की तरफ से भी पुलिस को तहरीर दी गई, जिस पर पुलिस कार्रवाई करने के बजाए अब तक मुकदमा भी दर्ज नहीं किया है। शनिवार को भी रोडवेज क्षेत्र में स्थिति शनिवार को भी पूर्व की भाति ही रही। मनबढ़ रोडवेज कर्मचारियों का सड़क कर आड़ा तिरछा वाहन खड़ा किया जाना जारी रहा तो प्रेशर हार्न भी दिन भर बजता रहा। शुक्रवार को विवाद के बाद जाम लगाने वालों के खिलाफ पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। सामान्य तौर पर यदि आम जनता किसी बात को लेकर चक्काजाम करती है तो पुलिस प्रशासन अपनी तरफ से जाम लगाने वालों पर मुकदमा दर्ज कराती है, लेकिन इस मामले में रोडवेज कर्मियों पर अब तक कोई कार्रवाई पुलिस ने नहीं की है। जरो इस ओर इशारा कर रहा है कि पुलिस पर रोडवेज कर्मचारियों का जबरदस्त दबाव है।