आजमगढ़। रुपयों के लिए सभी नियम ताक पर। जी हां ऐसे खुलासे प्रशासनिक जांच में ही सामने आ रहे हैं। तहबरपुर में स्व. विरई यादव कालेज को हाईस्कूल और रासेपुर के माता शनिचरा देवी इंटर कालेज को इंटरमीडिएट की मान्यता दी गई है। दोनों कालेजों की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षा में सेंटर बनाने के लिए अप्लाई किया गया था। प्रस्तावित केंद्रों की व्ययवस्था देखने के लिए अलग-अलग अधिकारियों की ओर से जांच सौंपी गई थी। दोनों कालेज की जांच में तहबरपुर में स्व. विरई यादव बालिका इंटर कालेज के नाम पर एक गड़ही में कुछ पिलर खड़े मिले थे। रासेपुर के माता शनिचरी देवी इंटर कालेज के नाम पर भी पिलर और दीवार खड़ी थी। जांच अधिकारी ने कमरों की संख्या शून्य दर्शा कर डीआईओएस को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट को भी डीआईओएस कार्यालय के कर्मचारी दबा कर बैठ गए हैं।
यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मान्यता के लिए कई मानक निर्धारित हैं। मसलन विद्यालय के नाम से निर्धारित मात्रा में जमीन होने चाहिए। इंटर के लिए निर्धारित साइज में 13 कमरे और हाईस्कूल के लिए निर्धारित साइज में आठ से ज्यादा कमरे, खेल के मैदान, फर्नीचर आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। निर्धारित मानकों के पूरा होने के बाद कालेज प्रबंधन की ओर से पहले आफलाइन और अब आनलाइन आवेदन किया जाता है। इसके बाद नियमानुसार अध्यक्ष डीआईओएस, सदस्य संबंधित एसडीएम और सदस्य जीआईसी या जीजीआईसी के प्रधान की कमेटी की ओर से इसका स्थलीय निरीक्षण किया जाता है। इनकी संतुति के बाद सचिव की ओर से मान्यता की कार्रवाई की जाती है।
तहबरपुर में स्व. बिरई यादव बालिका इंटर कालेज को कुछ साल पहले हाईस्कूल की मान्यता मिली थी। वहीं, रासेपुर के पास स्थित कूढ़ापार में माता शनिचरा देवी देवी इंटर कालेज को भी इंटर की मान्यता दी गई थी। यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले दोनों कालेजों की ओर से भी सेंटर बनाने के लिए आवेदन किया गया था। सेंटर बनाने से पहे सभी कालेजों पर व्यवस्थाओं की जांच कराई गई थी। इन दोनों कालेजों की भी जांच हुई ती। जांच के दौरान पाया गया कि दोनों ही विद्यालयों का सिर्फ ढांचा खड़ा था। किसी के सिर्फ पिलर गड़े थे तो किसी की सिर्फ दीवार खड़ी थी। जांच अधिकारी ने विद्यालयों के कमरों की संख्या शून्य दर्शा कर रिपोर्ट डीआईओएस कार्यालय में पहुंचा दी। रिपोर्ट के अनुसार दोनों कालेजों को सेंटर नहीं बनाया गया।
अब सवाल ये उठता है कि बिना जमीन, कमरों और अन्य व्यवस्थाओं को इन कालेजो ं को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मान्यता कैसे दे दी गई। जांच रिपोर्ट में उक्त आरोप के पुष्ट होने के बाद भी डीआईओएस विभाग के कर्मचारी रिपोर्ट को दबा कर बैठे हुए हैं। कार्रवाई से किनारा कसा जा रहा है।
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बचाव के लिए धारा 9/4 का दिया जा रहा हवाला
आजमगढ़। स्व. बिरई यादव बालिका इंटर कालेज के प्रबंधक की मानें तो कालेज को धारा 9/4 के तहत मान्यता दी गई थी। नियम के तहत जरूरी मानक पूरे नहीं होने पर भी कालेज को मान्यता दे दी जाती है। साथ ही एक वर्ष के तहत सभी मानकों को पूरा करना होता है। न करने पर मान्यता प्रत्याहरित कर ली जाती है। डीआईओएएस का भी यही कहना है। लेकिन इन कालेजों को मान्यता लिए चार साल से अधिक का समय बीत चुका है। एक तो वो नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, वहीं भवन नहीं होने पर भी सेंटर बनाने के लिए आवेदन कर कूटरचना और फर्जीवाड़ा भी कर रहे हैं। जनपद में इस तरह का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
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निधि जाने की भी चर्चा
आमजगढ़। सूत्रों की माने तो ऐसे कालेज के प्रबंधकों की ओर से पहले बिना भवन के ही मान्यता ले ली जाती है। इसके बाद विधायक और सांसदों से निधि लेकर कालेज के भवन तैयार करने की कोशिश होती है। मतलब अपना कुछ नहीं लगे सरकार के पैसे और उसी के आदेश पर विद्यालय तैयार हो जाए और उनकी कमाई होती रहे।
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ऐसे कालेजों को धारा 9/4 के अंतर्गत मान्यता मिली हुई है। फिर भी जांच की जाएगी कि निर्धारित समय पर उन्होंने शर्तें पूरी की हैं या नहीं। शर्तें पूरी नहीं करने पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके शर्मा, डीआईओएस