आजमगढ़। जिले में निर्मित कांशीराम शहरी आवासों की जांच की जा रही है। सत्यापन में पहले ही तीन सौ से ज्यादा लोगों ने अपने प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए थे। अब स्थलीय जांच में सिर्फ जाफर में ही लगभग 150 लोग अवैध रूप से रहते मिले हैं। डीएवी में भी अभी तक 26 लोग अवैध रूप से रहते मिले हैं। साथ ही 116 ने अपने प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए थे। इससे इन्हीं दोनों स्थानों पर लगभग 300 लोगों के अवैध मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोई किराये पर, कोई खरीद कर तो कोई रिश्तेदार के घर में निवास करते मिला है। जांच पूरी होने के बाद अवैध कब्जेदारों को बाहर का रास्त दिखाया जाएगा।
शिकायतों के बाद जिले में कांशीराम शहरी आवासों की जांच कराई जा रही है। पहले डूडा आफिस में सभी को प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने का मौका दिया। इसमें 325 लोगों ने अपने प्रमाण-पत्र ही प्रस्तुत नहीं किए। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई तो उन्होंने स्थलीय निरीक्षण के लिए कमेटी का गठन कर दिया। डूडा की ओर से अब आवासों की स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। चकगोरया और जाफरपुर की जांच पूरी हो चुकी है। जाफरपुर में लगभग 150 लोग अवैध रूप से रहते मिले हैं। यहां 492 आवासों में 488 आवंटित हैं। वहीं, डीएवी के पास स्थिति कांशीराम कालोनी की जांच की जा रही है। डीएवी में कुल 696 आवास आवंटित हैं। यहां 116 लोगों ने अपने प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए थे। स्थलीय जांच में 26 लोग अवैध रूप से रहते मिले हैं। इससे यहां बी अवैध रूप से रहने वालों की संख्या 150 के आसपास पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे सिर्फ इन्हीं दो कांशीराम कालोनियों में 300 लोगों के अवैध मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मजे की बात है कि कोई किराये पर, कोई खरीद कर तो कोई रिश्तेदार के घर में निवास करते मिल रहा है। पीओ डूडा डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद अवैध कब्जेदारों की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। अवैध रूप से रहने वालों को बाहर का रास्त दिखाया जाएगा।इसके बाद इन आवासों को पात्र लोगों को आवंटित किया जाएगा।
आखिर किसकी मिलीभत से तैयार हुए फर्जी प्रमाण-पत्र
आजमगढ़। कांशीराम आवासों की जांच में कई लोगों की ओर से प्रस्तुत किया गया आवंटन प्रमाण-पत्र भी फर्जी मिल रहे हैं। इसमें कई में तो जिलाधिकारी के हस्ताक्षर ही फर्जी तरीके से किए गए हैं। शुक्रवार को एडीएम प्रशासन लवकुश त्रिपाठी के पास पहुंची दर्जनों महिलाओं ने ये प्रमाण-पत्र उन्हें दिखाते हुए शिकायत पत्र सौंपा कि इसे डूडा कार्यालय से ही जारी किया गया था। यही नहीं ये भी बताया गया कि परिजनों की मौत के बाद आवास उनके नाम पर स्थानांरित करने बजाय। प्रमाण-पत्र पर ह्वाइटनर लगाकर उन्का नाम चढ़ा दिया गया है। उनका कहना था कि सात-आठ साल से वो लोग आवास में निवास कर रहे हैं। गलत प्रमाण-पत्र तैयार करने में डूडा आफिस के तत्कालीन कर्मचारियों और अधिकारियों की भी संलिप्तता नजर आ रही है। एडीएम प्रशासन लवकुश त्रिपाठी ने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। अवैध रूप से रहने वाले सभी लोगों को बाहर किया जाएगा। यदि ये लोग पात्रता की श्रेणी में आते हैं को आवेदन के बाद इन्हें आवास दिया जाएगा।